चकिया के मंगरौर गांव के समीप बिजली की मरम्मत कराते एसडीओ अनिल सिंह।
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सकलडीहा/शिकारगंज। मौसम में आए बदलाव के बाद बुधवार की शाम आई आंधी से जिले की बेपटरी हुई बिजली व्यवस्था बृहस्पतिवार तक पटरी पर नहीं लौटी। आंधी के दौरान चली तेज हवा से कई स्थानों पर हाईटेंशन तार टूट गए तो कहीं केबिल बॉक्स जल गया। उमसभरी गर्मी में बिजली न रहने से लोग परेशान रहे। ग्रामीणों को बृहस्पतिवार की सुबह पानी के लिए भी हलकान होना पड़ा।
सकलडीहा उपकेंद्र पर 12 घंटे और शिकारगंज में 30 घंटे बाद आपूर्ति बहाल हो सकी। तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। कटौती से करीब सवा सौ गांवों की आपूर्ति बंद रही। केबिल बॉक्स जल जाने से सकलडीहा बिजली उपकेंद्र से जुड़े सकलडीहा दक्षिणी, नोनार, कमालपुर व चहनियां फीडर के लगभग 80 गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। भोजापुर रेलवे क्रासिंग के समीप 33 केवीए का केबिल बॉक्स बुधवार की देर शाम आंधी के दौरान जल गया था। इससे उपकेंद्र से जुड़े सभी गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। विभागीय कर्मचारियों ने जले केबिल बॉक्स की मरम्मत कर बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे आपूर्ति बहाल की। इस दौरान लगातार 12 घंटे की बिजली कटौती से लोगों को काफी समस्या उठानी पड़ी। 12 घंटे की बिजली कटौती ने लोगों के सामने कई समस्याएं खड़ी कर दीं। छोटे बच्चों का गर्मी व उमस से बुरा हाल रहा। सुबह बिजली आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। एसडीओ आकाश सिंह ने बताया कि जले केबिल बॉक्स को ठीक करा आपूर्ति भी बहाल कर दी गई है। वहीं शिकारगंज क्षेत्र के बाबा जागेश्वरनाथ धाम परिसर स्थित जागेश्वर नाथ विद्युत उपकेंद्र में बुधवार की सुबह कोई खराबी आ गई। दिनभर मरम्मत के बाद जैसे ही आपूर्ति शुरू हुई कि शाम को आई आंधी के दौरान फिर ठप हो गई। जिससे तीन फीडरों से जुड़े 50 गांवों की में अंधेरा छा गया। उमसभरी गर्मी में उपकेंद्र पर आश्रित ग्रामीण के आगे भारी संकट खड़ा हो गया था। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने कार्य कर बृहस्पतिवार को दोपहर बाद करीब 30 घंटे बाद बिजली आपूर्ति आरंभ की।
ग्रामीण इलाके में 18 घंटे आपूर्ति की तैयारी
इलिया। चकिया विद्युत उपकेंद्र से आपूर्ति होने वाले सभी फीडरों को निर्धारित 18 घंटे आपूर्ति दिए जाने की तैयारी है। एसडीओ अनिल सिंह ने कहा कि आए दिन आंधी-तूफान के चलते बिजली के तारों व खंभों को गिरने के बाद भी शीघ्र मरम्मत करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी तैनात की गई है। ताकि ठप पड़ी विद्युत आपूर्ति बहाल की जा सके। क्षेत्र का अधिकतर भाग जंगलों व पहाड़ों के बीचबसा है। ऐसे में खराबी आने पर उसे ढूंढने में थोड़ा वक्त लग जाता है।