पीडीडीयू नगर। रेलवे में गैर सुरक्षा वाले पदों को सरेंडर करने के फैसले को लेकर आम लोगों में नाराजगी है। रेल यूनियन भी इसको लेकर लगातार आंदोलन कर रही है। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह बेरोजगारी को बढ़ाने वाला और रेलवे के हितों के विरोधी है।
रेलवे बोर्ड ने 20 मई को सभी जोनल के महाप्रबंधकों को पत्र जारी कर गैर संरक्षा श्रेणी के पचास फीसदी पदों को तत्काल समाप्त करने कहा है। इसके लिए 31 मई की तिथि निर्धारित भी की है। इस फैसले का सबसे अधिक असर वाणिज्य,कार्मिक विभाग के कर्मियों पर पड़ेगा। रेलकर्मी इसे रेलवे के निजीकरण की दशा में भी एक और महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। इसी कारण धरना प्रदर्शनों को दौर भी शुरू हो गया है। इसी क्रम में 27 मई को ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के आह्वान पर ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के बैनरतले रेलकर्मियों ने विभिन्न शाखाओं पर धरना प्रदर्शन किया था। अन्य यूनियनों के नेता भी आंदोलन की रूप रेखा तैयार करने में जुटे हैं। ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के केंद्रीय संगठन मंत्री बीबी पासवान ने कहा कि रेलवे के तुगलकी फरमान रेलकर्मियों का विराधी है। रेलवे ने पहले ही कई विभागों को समाप्त कर दिया है। नई भर्तियां लगभग बंद है। इससे रेलकर्मियों की संख्या कम है और रेलकर्मी तनाव में काम कर रहे हैं। अब बड़े पैमान पर पद को सरेंडर करने से न सिर्फ बेरोजगारी बढ़ेगी बल्कि रेलकर्मियों पर भी दबाव बढ़ेगा। इसी तरह ईसीआरकेयू शाखा तीन के सचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा कि रेलवे के इस फैसले से लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। जब पद ही नहीं रहेगा तो नई भर्तियां नहीं होगी। इससे बेरोजगारों की फौज बढ़ेगी। इसके खिलाफ यूनियन पुरजोर विरोध करेगा। इसको लेकर रणनीति बनाई जा रही है। इसी तरह नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे के केंद्रीय वर्किंग कमेटी के सदस्य और ईस्ट सेंट्रल रेलवे मेंस कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट सुरेश पंजियार ने कहा कि सरकार रेलवे का निजीकरण करना चाहती है। रेलवे पदों को समाप्त करने का फैसला भी इसी की एक कड़ी है। इसे पूरा होने नहीं दिया जाएगा। इंडियन रेलवे इंप्लाईज फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और ईस्ट सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज यूनियन के जोनल अध्यक्ष संतोष पासवान ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार रेलवे के निजीकरण के लिए काम कर रही है। सरकारी कंपनियों के निजीकरण के कारण बेरोजगारी की दर बढ़ रही है। रेलवे अब तक सबसे बड़ी रोजगार प्रदाता रही है लेकिन रेलवे की पहल से लाखों लोग बेरोजगारी का दंश झेलेंगे। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।