स्थानीय ईस्टर्न बाजार स्थित प्राचीन श्री राम मंदिर में चल रहे सात दिवसीय
श्रीराम कथा व पंचकुण्डीय श्रीराम महायज्ञ के तृतीय दन विद्वान
ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ मण्डप में यजमानों ने हवन पूजन किया
तथा नगर के श्रीराम भक्त महिलाएं व पुरूषों ने यज्ञ परिसर का फेरा लगाया।
वहीं
सायंकाल 7 से 10 बजे तक वृन्दावन धाम से पधारी प्रज्ञा मानव सेवा संस्थान
की संस्थापिका वैष्णवी प्रज्ञा भारती ने श्रोताओं को श्रीराम कथा का वर्णन
करते हुये सीता हरण व शिव विवाह का वर्णन किया। इस दौरान भक्तगण भावविह्वल
होकर भक्तिसागर में गोते लगाते रहे।
विदित हो कि श्री राम मंदिर
पापड़िया मठ के महामंडलेश्वर 1008 श्री महंत राम कृष्णदास जी महाराज जी के
सन्निध्य में विश्व कल्याणार्थ पंचकुण्डीय श्रीराम महायज्ञ का आयोजन किया
गया है। जिसके तहत 22 से 28 अप्रैल तक प्रतिदिन सायं 7 से 10 बजे तक
वैष्णवी साध्वी प्रज्ञा भारती जी द्वारा श्रीराम कथा की अमृतवर्षा हो रही
है। कथा के तृतीय दिन रामचरित मानस की व्याख्या करते हुये माता सीता के हरण
तथा शिव विवाह का वर्णन किया।
आततायी रावण जिसने सीता माता का धोखे से हरण
कर लिया और जब वह उन्हे लेकर आकाश मार्ग से जा रहा था तब राम भक्त गृद्ध
जटायु ने नारी की रक्षा के लिये पापी रावण से कितनी लड़ाई की और अन्तत:
अपनी जान तक दे दी। आज हम समाज में नारी का अपमान होते देखकर भी आंख मुंद
लेते है। जटायु पक्षी होकर भी माता सीता को बेटी कहकर सम्बोधित करते है।
आज
मानव का आहार विहार कैसा हो गया है कि जो अपनी पुत्री को भी अपनी बेटी
नहीं समझ रहा है। रामचरित मानस में सीता का हरण अर्थात भारतीय नारी का हरण
देखकर जटायु अपनी जान दे देता है। एक मृग के कारण सीताहरण हुआ और दूसरे मृग
के कारण सीता का पता चला।
एक मृग धरती पर चलता है तो दूसरा मृग शाखा पर
चलता है। वही सीता का पता बताता है। भगवान राम खगों से पश्रों से, लता से
हवा से सीता का पता पूछते है। भगवान को धोखा देने के लिये नकली सीता बनीं,
स्वरूप बनाया लेकिन आचरण नहीं बदल सकी। भारतीय नारी की प्रतिमूर्ति माता
सीता कभी भी पति से आगे नहीं चली लेकिन नकली सीता आगे- आगे चलने लगी।
जिसका
अन्त काफी दुखद हुआ। उन्होने परमात्मा के महात्म्य के बारे में बताया कि
परमात्मा की परीक्षा नहीं लेनी चाहिये क्योकि परमात्मा परीक्षा से नहीं
बल्कि प्रतीक्षा से प्राप्त होते है। अगर सती की तरह परीक्षा ली तो दुर्गति
होने से कोई नहीं रोक सकता। कथा के दौरान तबले पर पंडित प्रभाकर पाण्डेय,
बैंजो पर राजकुमार, मजीरा पर दीपक पाण्डेय व कोरस पर कृष्ण कुमार तिवारी ने
संगत किया।
इस दौरान नगर व आसपास के क्षेत्रों से आये सैकड़ो भक्तों ने
श्रीराम रसायन का अमृतपान किया और भक्तिसागर में डूबतू उतराते रहे।
कार्यक्र्तम को सफल बनाने में श्रीराम मंदिर पापड़िया मठ से जुड़े लोगों ने
सहयोग प्रदान किया।