पीडीडयू नगर। छूट्टा पशुओं की देख भाल के लिए निराश्रित पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं लेकिन यहां भी पशुओं की ठीक से देख-भाल नहीं हो पा रही है। पशु आश्रय स्थलों में निराश्रित पशु ठंडी में ठिठुर रहे हैं। न तो उन्हें बचाव के लिए जूट का बोरा ओढ़ाया गया और न ही अलाव की व्यवस्था की गई।
जिले के पशु आश्रय स्थलों में 2278 निराश्रित पशु रखे गए हैं। पशुओं के खाने-पीने की व्यवस्था करने और शेड आदि की देख रेख की जिम्मेदारी बीडीओ और नगर निकाय के ईओ को सौंपी गई है। ठंड में के मौसम में पशुओं को ठंडी से बचाने के लिए जूट केे बोरे ओढ़ाना है और अलाव की व्यवस्था की जा नहीं है। यहां पशुओं की देख-भाल के लिए सफाईकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि अधिकतर व्यवस्था कागजों पर ही दिख रही है। मंगलवार को विभिन्न पशु आश्रय स्थलों को देखने पर यहां की व्यवस्था नाकाफी दिखी। पीडीडीयू नगर से सटे अलीनगर में पशु आश्रय स्थल पर शाम के वक्त पशुओं को सूखा भूसा खाने को दिया गया था। पशुओं को न तो ओढ़ने को दिया गया और न ही अलाव जलाया गया। पशु आश्रय स्थल पर पांच कर्मचारी नियुक्त हैं।
चंदौली संवाददाता के अनुसार नगर पंचायत के वार्ड नंबर आठ स्थित कान्हा गोवंश आश्रय में कुल 141 और जिला पंचायत कार्यालय के बगल में गौशाला में 25 पशु हैं। खाने पीने की व्यवस्था तो ठीक है लेकिन उनके रखरखाव की व्यवस्था ना होने के कारण पशु बेहाल है। किदवई नगर में 8 कर्मचारी दिन में और तीन रात में लगाए गए हैं। वहीं जिला पंचायत के बगल में स्थित गौशाला में दो कर्मचारियों की तैनाती की गई जो पशुओं की देखभाल करते हैं। नियामताबाद संवाददाता के अनुसार पशु आश्रय स्थल कठौडी मे 205 पशु रखें गए हैं। पशुुुओं की देख रेख के लिए चार सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी तीन शिफ्टों में लगाया गया है। पशुओं की देखरख के लिए पशु चिकित्सक डॉ. राम अवध यादव रहते हैं। पशुओं को सुखा भूसा खाने को डाला गया था।
पशु आश्रय स्थलों में पशुओं को देख रेख की जिम्मेदारी बीडीओ, ईओ आदि को दिया गया है। पशुओं के अच्छे खाने की व्यवस्था करने के साथ ही ठंडी से बचाव के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां से कमी की शिकायत मिलती है। कार्रवाई की जाती है।
डॉ. एसपी पाडेय मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंदौली
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