दुलहीपुर। स्थानीय जाफरी स्ट्रीट में आयोजित 10 दिवसीय मशकों अलम का कार्यक्रम अकीदत के साथ पूरा हुआ। अंतिम दिन अलम, अमारी और दुलदुल का पारंपरिक जुलूस निकाला गया।
अंजुमन सज्जादिया असगरिया दुलहीपुर की ओर से आयोजित कार्यक्रम के समापन पर अलम, अमारी और दुलदुल का जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। दस दिनों तक आयोजित मजलिसों में विभिन्न अंजुमनों ने नौहाखानी और मातम पेश कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। कार्यक्रम में अंजुमन जवादिया कटेसर, दुलहीपुर बंजर, हाशमिया रामनगर, नसीरुल मोमिनीन, दोषीपुरा समेत कई अंजुमनों ने भाग लिया।
मजलिस को मौलाना कैंसर हुसैन नजफी और मौलाना नकी बनारसी ने हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी पर प्रकाश डाला और इन्सानियत, सब्र और न्याय का संदेश दिया। मरहूम नवाब शहजादे के इमामबाड़े से अलम, अमारी और दुलदुल का जुलूस रवाना हुआ। विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए जुलूस आगा नजफ साहब में समाप्त हुआ। जुलूस में फराज हुसैन, राहिब जाफरी, यासिर जाफरी, फैजी जाफरी, मास्टर जैगम, सैयद आले अब्बास, डॉ. सहजील, मिर्जा काशिफ जाफरी, मोनी, जौहर अली, जमशेद हुसैन जैदी, मौलाना बेलाल जैदी, उरूज हैदर, यूसुफ हुसैनी आदि रहे।