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13.59 करोड़ रुपये से होगा नगर का विकास

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पीडीडीयू नगर पालिका सभागार में बोर्ड की बैठक में उपस्थित चेयरमैन संतोष खरवार व सभासदगण। - फोटो : CHANDAULI
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पीडीडीयू नगर। नगर पालिका पंडित दीनदयाल उपाध्याय बोर्ड की साधारण बैठक में सोमवार को विकास कार्यों पर मंथन हुआ। जिसमें सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था से लेकर पानी की आपूर्ति के लिए लगभग 13.59 करोड़ का प्रस्ताव पास किया। इसमें लगभग 6.29 करोड़ से होने वाले कार्यों को शुरू कराने पर मुुहर लगाई। वहीं लगभग 7.29 करोड़ रुपये से आगे और विकास कार्य कराए जाने के लिए प्रस्ताव पास किया गया।
बोर्ड की बैठक करीब 12 बजे शुरू हुई। बैठक में सबसे पहले पिछली कार्रवाई की पुष्टि की गई। इसके बाद नगर के विकास के कार्यों पर मंथन शुरू हुआ। इस दौरान 14वें वित्त से लगभग 4.31 करोड़ रुपये से नाली, सड़क निर्माण समेत नगर में प्रकाश व्यवस्था के लिए 60 वॉट की 640 लाइटें खरीदने पर स्वीकृति बनी। इस दौरान अवस्थापना निधि से 52.60 लाख से विकास के कार्य कराए जाने पर मुहर लगी। इसी प्रकार राज्य वित्त से लगभग 78. 52 लाख रुपये भी कार्य कराए जाने पर सहमति बनी। इसमें विद्युत सामग्रियों की खरीदारी शामिल रही। वहीं पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना से 67. 38 लाख रुपये से कई निर्माण कार्य कराए जाने को निर्णय लिया गया। इस दौरान होटलों में प्रति कमरों पर स्वच्छता शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर सभासद बृजेश गुप्ता ने आपत्ति जताई, जिसके बाद सभी सभासदों की सहमति पर स्वच्छता शुल्क नहीं लगाए का प्रस्ताव पास किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष संतोष खरवार, अशोक जायसवाल, बृजेश गुप्ता, राजेश जायसवाल, विनय यादव, मो. ईशा खां, सिकंदर पासवान, आरती यादव, पिंकी शर्मा, प्रियंका तिवारी, समेत बैठक के सचिव अतुल कुमार, जेई मुरलीधर मौजूद रहे।
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पीडीडीयू नगर। नगर पालिका बोर्ड की बैठक में जिन 6.29 करोड़ रुपये से कराए जाने वाले कार्योँ पर मुहर लगी है उसमें कुल 121 कार्य कराए जाएंगे। इसमें नाली, खड़ंजा, सीवर, स्ट्रीट लाइट, सफाई, डस्टबीन के अलावा मरम्मत के कार्य शामिल हैं। वहीं 7.29 करोड़ रुपये से आगे कार्य कार्य कराए जाने पर भी सहमति बनी। इसमें भी विकास से जुड़े कार्य कराए जाएंगे।
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पीडीडीयू नगर। नगर पालिका की ओर से हाईकोर्ट में पक्ष रखने के लिए अधिवक्ताओं के चयन के मामले सुनील विश्वकर्मा ने ईओ पर जनप्रतिनिधि बोर्ड के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। सभासद का कहना है कि हाईकोर्ट में पैरवी के लिए नगर पालिका की ओर से दो अधिवक्ताओं को सूचीबद्ध किया गया था। जबकि ईओ की ओर से अलग से एक अन्य अधिवक्ता से पालिका कार्य कराया जा रहा है। इस पर सभी सभासदों ने शासन को इसकी शिकायत भेजने और सूची के बाहर के अधिवक्ता को पेमेंट नहीं किए जाने का प्रस्ताव पास किया। वहीं ईओ कृष्णचंद्र ने कहा कि प्रशासनिक और नगर पालिका के कार्यों के लिए नगर पालिका अधिनियम 1916 के तहत अधिवक्ता को रखा गया है। बताया कि जनप्रतिनिधि बोर्ड को अधिनियम से तहत अधिवक्ताओं को सूचीबद्ध करने का अधिकार नहीं है।
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