देश में बढ़ते मॉल कल्चर के बावजूद नगर में फुटपाथी बाजार की रौनक बढ़ती जा
रही है। कभी इक्का दुक्का दुकानों से शुरू हुआ सोमवारी बाजार आज एक दिवसीय
सबसे बड़ा बाजार बन गया है।
यहां न सिर्फ गरीब ही नहीं संपन्न
तबके के लोग भी खरीददारी करने पहुंच रहे हैं। आम लोगों का मानना है कि यहां
पर सामान अच्छा भी मिल जाता है और सस्ता भी। जीटी रोड के किनारे लगने वाला
बाजार न सिर्फ खरीददारी के लिए बल्कि बाजार भ्रमण में घूमने के लिए भी
अच्छा विकल्प बनकर उभरा है।
महानगरों में फुटपाथों पर बाजार सजते हैं।
एक दशक पूर्व नगर के जीटी रोड पर सोमवार को बाजार बंद होने का फायदा उठाकर
कुछ बाहरी लोगों ने फुटपाथ पर दूकान सजाना शुरू किया।
थोड़ी सी हिचक के
साथ लोगों ने खरीददारी शुरू की लेकिन देखते ही देखते आज यह विशाल बाजार बन
गया है। सोमवार को जीटीआर ब्रिज से सुभाष पार्क तक करीब एक किलोमीटर एरिया
में सैकड़ों दूकानें सज रही है।
इसमें कपड़े, खिलौने, जूते, आर्टिफिशियल
गहने, सजावटी वस्तुओं सहित घरेलु जरूरत की हर सामान मिल रही है।
बाजार के
कारण सोमवार को सड़क पर चहल पहल अधिक होने की वजह से जाम की स्थिति भी होती
है लेकिन नगरवासियों के लिए इसका अलग ही मजा है।
यदि आर्थिक आंकड़ों
का अनुमान लगाया जाए तो सोमवार को यहां लाखों रुपये मूल्य के सामान की खरीद
फरोख्त होतती है। यही नगर ही नहीं बल्कि आस पास के ग्रामीण इलाकों से
सैकड़ों लोग खरीददारी करने पहुंचते हैं। नामी गिरामी कंपनियों की तर्ज पर
सस्ता सामान मिलने से लोग भी इसे खरीदना पसंद करते हैं।
सोमवार बाजार में
दुकानदारों की माने तो वे भदोही, वाराणसी, जौनपुर सहित अन्य जिलों से आकर
दूकान सजाते हैं। यहां सर्वाधिक बिक्री की बात की जाए तो कपड़े और साड़ियों
के खरीददारी सर्वाधिक होती है।