छात्रों में बढ़ती अनुशासनहीनता, वर्तमान समय में विद्यालयों एवं अभिभावकों
की एक बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आयी है। वर्तमान परिवेश में
तेजी से बदलाव हो रहा है।
संचार और तकनीकी के साधनों में नित होते
परिवर्तनों ने बच्चों की सोच और उनकी जीवन-शैली को परिवर्तित किया है। ऐसे
में जरूरी हो जाता है कि शिक्षक भी समयानुकूल, स्वयं में बदलाव करते हुए
छात्रों की मन:स्थिति को गहराई से समझें और उन्हें शिक्षित करने का प्रयास
करें।
सनबीम स्कूल में आयोजित आर्ट आफ पाजिटिव पैरेंटिंग कार्यशाला में ये
विचार उम्मीद फाउंडेशन कोलकाता की प्रमुख एवं सीबीएससी की परामर्श समिति की
सदस्य मनोविज्ञानी डॉ. सलोनी प्रिया ने व्यक्त किए।
अभिभावकों एवं
शिक्षकों को गुड पैरिंटिंग के गुर समझाते हुए कहा कि ‘‘प्यार और उचित तर्क
के सहारे ही छात्रों में अनुशासन लाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि
शिक्षक एवं अभिभावक हर समय, हर छात्र को एक ही नजरिए से न देेखे। डर और भय
से विकसित अनुशासन कभी भी स्थायी नहीं हो सकता।
स्थायी अनुशासन प्राप्त
करने के लिए तो छात्रों में इस समझ को विकसित करने की आवश्यकता है कि उनमें
सही और गलत परखने की क्षमता का विकास हो और वे परिस्थितियों के अनुकूल
अपने व्यवहार को नियंत्रित करना सीखें। छात्रों में जिम्मेदारी की भावना का
एहसास कराकर ही अनुशासन प्राप्त किया जा सकता है।
इससे पूर्व शिक्षकों
के संग उन्होंने ‘पैस्टोरल गाइड’ प्रशिक्षण का अंतिम चरण पूर्ण किया।
‘पैस्टोरल गाइड’ काउंसिलिंग की एक प्रक्रिया है। जिसमें शिक्षकों को
प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे छात्रों की मन: स्थिति का सही-सही आंकलन
करके, उनकी समस्याओं को समझते हुए, उन्हें उचित मार्ग दर्शन दे सकें।
डॉ.
सलोनी प्रिया ने शिक्षकों को समझाया कि काउंसिलिंग की यह प्रक्रिया इस तरह
से पूरी की जाए कि बच्चे के मन का सारा डर और संकोच निकल जाए और उसे लगने
लगे कि सामने बैठा व्यक्ति उसकी सहायता करने को तत्पर है। इस प्रशिक्षण
सिविर में चयनित शिक्षकों ने भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय की निदेशिका
श्रीमती श्वेता कानुडिया, प्रधानाचार्य डॉ. शैलेश सिंघल आदि उपस्थित
रहे।