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फर्जी दस्तावेज के साथ पांच संदिग्ध गिरफ्तार

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दुलहीपुर। स्थानीय गांव में फर्जी दस्तावेज के साथ रह रहे पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पांचों के बांग्लादेशी होने की आशंका है। पुलिस पांचों को गोपनीय स्थान पर रख कर पूछताछ कर रही है। पकड़े गए संदिग्ध तीन माह से दुलहीपुर में किराए के मकान में रह रहे थे और शनिवार को प्रधान के पास आधार कार्ड बनवाने के लिए प्रमाण पत्र बनवाने गए थे।
गांव की प्रधान नीतू गुप्ता के आवास पर शनिवार को बारी-बारी से छह लोग पहुंचे और आधार कार्ड बनाने के लिए प्रधान के लेटरहेड पर निवास प्रमाण पत्र बनाने की मांग की। सभी ने निर्वाचन कार्ड दिया। निर्वाचन कार्ड इसके अनुसार पांचों का नाम क्रमश: शकील अंसारी पुत्र गुड्डू अंसारी, रिंकू यादव पुत्र छन्ना यादव, बाबू खां पुत्र रियाज खां, अंसार खां पुत्र हामिद खां, फारुख अंसारी पुत्र अशरफ अंसारी और चंदन पुत्र हरिश पटेल निवासी दुलहीपुर था। आशंका होने पर प्रधानपति आनंद गुप्ता ने पांचों से पूछताछ शुरू की। इस पर वे ठीक से हिंदी नहीं बोल पाए और पूरा पता भी नहीं बता सके और सभी वहां से धीरे से मौका पाकर खिसक लिए। इस पर प्रधानपति ने पीछा किया तो वे एक मकान में घुस गए। प्रधानपति ने पुलिस को सूचित किया और बताया कि संदिग्ध लोग गांव में रह रहे थे। सूचना पाकर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि वह मकान वाराणसी निवासी एजाज का है। सभी तीन माह से वहां रह रहे थे। पुलिस के पहुंचते ही सभी छत पर जा छिपे लेकिन पुलिस ने कमरे में घुसकर आवश्यक दस्तावेज सहित अन्य सामान बरामद किया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया और अपने साथ ले आई। वहीं मौका पाकर एक संदिग्ध फरार हो गया। फिलहाल पुलिस सभी को गोपनीय स्थान पर पूछताछ कर रही है। साथ ही खुफिया विभाग भी जांच पड़ताल में जुट गई है। चर्चा है कि पांचों के कमरे असलहे भी बरामद हुए हैं। हालांकि पुलिस कुछ भी कहने से बच रही है लेकिन माना जा रहा है कि गिरफ्तार पांचों बंग्लादेशी हैं। सीओ सदर प्रदीप सिंह चंदेल ने बताया कि संदिग्ध पांच लोग हिरासत में लिए गए हैं और उनकी शिनाख्त की जा रही है।
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पीडीडीयू नगर। क्षेत्र में बांग्लादेशियों के पकड़ने के खुलासा पहली बार नहीं है। 28 मई 2017 को दुलहीपुर क्षेत्र से चार बांग्लादेशी पकड़े जा चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस की नींद नहीं टूटी। पकड़ने के बाद पुलिस कार्रवाई कर सुस्त हो जाती है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय-समय पर बाहरी आने वालों की जांच पड़ताल करती तो इस पर नकेल कसी जा सकती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में खुफिया विभाग ने दुलहीपुर समेत कई क्षेत्र में बांग्लादेशियों और बाहरियों के बसने की रिपोर्ट भी केंद्र सरकार को भेज चुकी है। इसके बाद भी स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। सूत्रों का कहना है कि पुलिस और वोट की राजनीति से बाहरियों को वाशिंदा बना दिया गया। इसका खामियाजा क्षेत्रीय लोगों को भुगतना पड़ता है। इसी का नतीजा रहा कि वर्ष 2011 में मलोखर में दंगा हो गया था। जिसमें काफी संख्या में नुकसान हुआ था।


दुलहीपुर। बुनकर बाहुल्य इलाका होने की आड़ में दुलहीपुर सहित आसपास के गांवों में बाहरियों का जमावड़ा हो गया लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पुलिस प्रशासन या फिर खुफिया विभाग तक को इसकी भनक नहीं लगी और वहां हजारों की तादात में बाहरी आकर बस गए। इलाके में फर्जी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड बनाने का भी खेल लंबे समय से चल रहा है लेकिन किसी को जानकारी तक नहीं हो सकी। पिछले पंचायत चुनाव के समय सतपोखरी में फर्जी आईडी बनाने का भंडाफोड़ पुलिस ने किया था मगर इसके बाद फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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स्थानीय लोगों की माने तो वहां एक दशक में तकरीबन 10 हजार बाहरी आकर बस गए और वहां रहने लगे। वोट की राजनीति में इनके मतदाता पहचान पत्र भी बना दिए गए। दुलहीपुर, सतपोखरी, मलोखर, भिसौड़ी और सकुर का भट्टा क्षेत्र में एक दशक पहलेे जनसंख्या दो से तीन हजार थी आज वह बढ़कर 10 हजार के ऊपर हो गई। इसके बाद भी कभी न तो कोतवाली पुलिस या फिर लोकल खुफिया विभाग ने इस पर ध्यान दिया। दरअसल दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों से सीधे बांग्लादेशी पीडीडीयू जंक्शन पर आते हैं और वहां से दुलहीपुर क्षेत्र में पहले ढाबे या चंदासी में कोल मंडी में काम करना शुरू करते हैं। पहले किराए के मकान में रहना शुरू करते हैँ और बाद में वहां का निवासी बन जाते हैं।
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