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सिपाही को भी इंदिरा आवास

Wed, 16 Dec 2015 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
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क्षेत्र के सुढ़ना गांव में इंदिरा आवास निर्माण में हुई धांधली का जांच  करने मंगलवार की सुबह उपायुक्त ग्राम विकास उत्तर प्रदेश वीके भागवत  पहुंचे।
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जांच के दौरान नाबालिगों को भी इंदिरा आवास आवंटित मिला, तो वहीं  गांव से बाहर रहकर नौकरी करने वाले इंदिरा आवास के लाभार्थी मिले।  यहां तक कि उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात सिपाही को भी इंदिरा आवास मिला दिखाया गया।  जबकि सिपाही का  दो मंजिला भवन  पाया गया।

जांच में अधिकांश आवास, शौचालय अपूर्ण पाए गए।
उच्च न्यायालय के  आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने क्षेत्र के सुढ़ना गांव में बने पचास इंदिरा आवास की जांच के लिए उपायुक्त ग्राम विकास उत्तर प्रदेश को सुढ़ना गांव  भेजा।
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 करीब साढ़े दस बजे दिन में उपायुक्त सुढ़ना गांव पहुंचे। गांव में  बने पचास इंदिरा आवासों का डोर टू डोर जांच करने में उपायुक्त को करीब चार  घंटे लगे। इंदिरा आवास के लाभार्थी अशोक ने दरवाजे पर पहुंचे उपायुक्त को  बताया कि खाते में पैसा तो आया था लेकिन ग्राम प्रधान द्वारा खाते से पैसा  निकलवाकर पूरा पैसा ले लिया गया। जिसके चलते आवास अपूर्ण हैं।

उसके बाद  उपायुक्त बादशाह के यहां पहुंचे जहां चार कमरों का मकान बना मिला। उसी  कमरे में से एक कमरे को इंदिरा आवास बताया गया। जबकि बादशाह का परिवार  लुधियाना में किसी प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है। विजयी के आवास में  बाकायदा गाय भैंस बंधी मिली।


सतीश और नरेश के यहां सभी लोग चंडीगढ़ में  रहते हैं। उनके आवास पर ताला बंद मिला। रामपति और शिवमुनि का तो दस वर्ष  पूर्व ही आवास बना है। लेकिन उसमें 2010 से 2015 के बीच बना हुआ दिखाकर  खाते से 75 हजार रुपये निकाल लिया गया। उसके बाद उपायुक्त चंदन और हरिवंश  के यहां पहुंचे जो चेन्नई में रहते हैं लेकिन यहां पर उनके मां का बना एक  कमरा दिखाकर उसे ही इंदिरा आवास बताने का प्रयास किया गया।

 सबसे बड़ी बात  तो यह थी कि इरफान को इस्तियाक के बीपीएल आईडी पर इंदिरा आवास आवंटित कर  दिया गया है। वहीं हैदर के आईडी पर उसके पुत्र सरीफुल को आवास आवंटित किया  गया है।

कई लाभार्थियों ने इंदिरा आवास के लिए घूस लेने की बात उपायुक्त  ग्राम विकास को बताई। गांव के अनवर ने मौके पर पहुंची जांच टीम से कहा कि  प्रधान ने 21 हजार रुपया आवास देने के लिए लिया और पैसा भी खाते में आया  लेकिन प्रधान ने 75 हजार रुपये निकाल लिया और कहा कि भट्ठे से ईट दिलाकर  आवास बनवाया जाएगा। लेकिन ईट नहीं मिली। इसीलिए आवास नहीं बना।

 गांव के  गुड्डूू , बिकाऊ सहित अन्य लोगों ने बताया कि आवास के लिए कुछ ईट और बालू  गिराकर प्रधान और सेक्रेटरी द्वारा आवास के लिए मिले धन का बंदरबांट कर  लिया गया। गांव में इंदिरा आवास बहुत सारे अपूर्ण पाएं गए साथ ही शौचालय भी  अपूर्ण मिले।

गांव के मुन्ना, अंतू, राजू आवास मिलने के समय नाबालिग थे  लेकिन आवास आवंटित कर ग्राम प्रधान द्वारा खाते से धन निकाल लिया जाना पाया गया। इस दौरान समूचे ग्रामीण मौके पर उपस्थित रहे।
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