नगर सहित पूरे जिले में अक्षय नवमी का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया।
लोगों
ने आंवले के वृक्ष की पूजा अर्चना की और उसके नीचे भोजन बनाकर प्रसाद
ग्रहण किया।
इस अवसर पर सफेद कोहड़े का दान भी किया गया। जगह-जगह आंवले के
वृक्ष के नीचे लोग जुटे और गीत व जयकारों से इलाका गूंजता रहा।
कार्तिक
मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को गुप्तदान और आंवले के नीचे भोजन करने
का विशेष महत्व है। शुक्रवार की सुबह से ही व्रत की तैयारी शुरू हो गई।
विशेष कर महिलाओं ने निराजल व्रत रहकर आंवले के वृक्ष के नीचे पहुंच कर
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आंवले के वृक्ष को कृष्ण का अवतार मानकर पूजा
अर्चना की।
कथा सुनने के बाद कूष्मांड (सफेद कोहड़ा) में सोना, चांदी,
रुपये आदि को भरकर गुप्त रूप से दान किया। इसके बाद आंवले के नीचे विविध
प्रकार के व्यंजन तैयार किए और पूरे परिवार के साथ बैठ कर खाना खाया।
कैलाशपुरी शिव मंदिर पर तो मेला लगा।
यहां सुबह से दर्जनों परिवार के लोग
पहुंचे और बाटी चोखा, पूड़ी सब्जी, हलवा, कढ़ी चावल आदि बनायी। जो वहां
भोजन नहीं बना सके वे घर से ही भोजन तैयार कर ले गए और आंवले के नीचे बैठ
कर पूरे परिवार के साथ खाया।
इसी तरह शास्त्री कालोनी, आरपीएफ कालोनी, गया
कालोनी, सेंट्रल कालोनी अक्षय नवमी मनाई। तमाम बाहरी लोगों ने भी पहुंच कर
विशेष अवसर पर प्रसाद ग्रहण किया।