पीडीडीयू नगर। धान के कटोरे से प्रख्यात जिले के किसान कृषि सुधार नीति को लेकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों के हित के नाम पर सरकार कारपोरेट कंपनियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। यदि किसानों की चिंता है तो पहले एक राष्ट्र एक एमएसपी लागू किया जाए। जब किसानों के हित सुरक्षित हों तभी इसे कानूनी अमली जामा पहनाया जाए।
भाकियू के मंडल अध्यक्ष दीनानाथ श्रीवास्तव ने कहा कि संगठित व्यापारिक समूहों के आगे किसानों को सरकारी संरक्षण (समर्थन मूल्य पर खरीदारी सुनिश्चित) करने की जरूरत है जो अध्यादेश में कहीं भी नहीं है। भाकियू भानु के मंडल अध्यक्ष संतविलास सिंह का कहना है कि आज के यांत्रिक युग में किसानों के लिए सरकारी सहयोग की आवश्यकता है। इस बिल से किसानों का हित नहीं होगा। तभी किसानों के हित का संरक्षण होगा। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के युवा मंडल अध्यक्ष वाराणसी मिथलेश उर्फ मनमन सिंह का कहना है कि इस विधेयक के जरिए व्यापारियों द्वारा फसलों की जमाखोरी की संभावना काफी बढ़ जाएगी। वहीं भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष संतोष मिश्र ने कहा केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए कृषि विधेयक किसान हित में है। किसान संघ द्वारा कुछ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद, क्रय करने वाली एजेंसियों का पंजीकरण आदि मांग जो किसानों को संदेश था सरकार इसे शामिल कर रही है। किसान को भूमि के मालिकाना हक से कोई सरकार नहीं छिन सकती। अधिनियम किसानों के हित में है।
नए कृषि विधेयक में किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020 में एक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का प्रावधान किया गया है। इसकेेे तहत ऐसा माहौल तैयार किया जाएगा, जहां किसान और व्यापारी देश के किसी भी राज्य में जाकर अपनी उपज को बेच और खरीद सकेंगे। इसी तरह दूसरे बिल में किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक के तहत कृषि समझौते पर राष्ट्रीय ढांचे को तैयार करने का प्रावधान किया गया है। इसकेे तहत किसानों को कृषि व्यापार में , व्यापारियों, निर्यातकों इत्यादि के लिए पारदर्शी तरीके से सहमति वाला लाभदायक मूल्य ढांचा उपलब्ध कराना है।