डूही-सूही गांव स्थित एक हास्टल में रहने वाले कक्षा तीन के छात्र बृजेश की
बुधवार की भोर में बीएचयू के सर सुंदर लाल चिकित्सालय में इलाज के दौरान
मौत हो गई।
छात्र का शव लेकर वापस पहुंचे परिवार वालों व ग्रामीणों
ने हास्टल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुये हंगामा किया। सूचना मिलने पर
मौके पर पहुंचे कोतवाल ने लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया।
बिहार के
कैमूर जिले के चांद थाना अंतर्गत चन्ना गांव निवासी पेशे से मजदूर
रामप्रताप ने अपने नौ वर्षीय पुत्र बृजेश को गरीबों के बच्चों के लिए काम
कर रही संस्था के हास्टल में 2013 में दाखिला कराया था।
बृजेश सोसायटी के
खर्च पर चकिया प्राथमिक व़िद्यालय प्रथम में कक्षा 3 में पढ़ता था।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से बृजेश की तबीयत खराब चल रही थी।
मंगलवार
को बृजेश की हालत नाजुक होने पर ग्रामीण सुजीत ने उसे स्थानीय जिला
संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया। हालत गम्भीर होने पर डाक्टरों ने उसे
बीएचयू के लिए रेफर कर दिया। इलाज के दौरान बुधवार की तड़के उसकी मौत हो
गई।
संस्था पर समयानुसार खाना और दवा न देने की लापरवाही का आरोप लगाते
हुए उन्होंने ग्रामीणों को साथ लेकर हंगामा मचाना शुरू कर दिया।
हंगामा
की सूचना पर पहुंचे कोतवाल आरएन उपाध्याय ने लोगों को समझाया बुझाया।
कोतवाल ने बताया कि परिवार वालों ने बालक के शव को लेकर हास्टल पर हंगामा
किया था। इसकी सूचना मिने पर पुलिस वहां पहंुची तथा हंगामा कर रहे
परिजनों को समझाबुझाकर शांत करा दिया।
इस संबंध में अभी तक परिवार की तरफ
से सोसायटी के विरुद्ध कोई तहरीर नहीं दी गई है।
अगर तहरीर मिलती है आगे
की कार्रवाई की जाएगी।