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ठंड बनी काल, तीन की मौत

Fri, 18 Dec 2015 01:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
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जनपद में ठंड और गलन जानलेवा बनती जा रही है। गुरुवार को तीन लोगों की ठंड की चपेट में आने से मौत हो गई।
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वहीं शीतल बयार ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। इससे लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं।

स्थिति यह है कि दोपहर में ही लोग घर से निकल रहे हैं और शाम ढलते ही लोग घरों में दुबक रहे हैं। ठंड की वजह से गर्म कपड़ों की डिमांड बढ़ गई है। यही नहीं दिन भर लोग अलाव, हीटर आदि का सहारा ले रहे हैं। गुरुवार को भी गत तीन दिनों की तरह न्यूनतम पारा नौ पर टिका रहा।


जिले में ठंड लगने से गुरुवार को बबुरी, इलिया और धीना थाना क्षेत्रों में एक लेखपाल सहित तीन लोगों की मौत हो गई।
बबुरी संवाददाता के अनुसार थाना क्षेत्र के चांडीपुर उतरौत निवासी सियाराम प्रसाद (50) लेखपाल थे।

 वे बुधवार की रात अपनी ससुराल हड़रिका जा रहे थे।  पहले वे वाहन से बबुरी पहुंचे और वहां से पैदल ही हड़रिका के लिए चल दिए। अंधेरा होने की वजह से रास्ता ठीक से नहीं दिखा और पैर फिसलने से वे सड़क के किनारे नहर में गिर गये। गुरुवार की सुबह आसपास के लोगों ने उन्हें मृत देखा।
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 सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। थानाध्यक्ष विश्वज्योति राय ने बताया कि प्रथम दृष्टया मौत ठंड की वजह से हुई लगती है। हालांकि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।


धीना संवाददाता के अनुसार थाना क्षेत्र के बरहन गांव निवासी चंद्रशेखर यादव (55) बुधवार की रात खलिहान में धान की रखवाली करने गये थे। गुरुवार की सुबह देर तक न जागने लोग पहुंचे, तब तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इलिया संवाददाता के अनुसार सैदपुर कस्बा निवासी छोटक राम (75) की ठंड की वजह से मौत हो गई। परिवार वालों के अनुसार छोटक के पेट में रात बारह बजे दर्द उठा। घर वालों ने पड़ोसियों की मदद से 102 नंबर एंबुलेंस से चकिया स्थित संयुक्त चिकित्सालय पहुंचाया। यहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इस तरह अब तक जिले में ठंड से मरने वालों की संख्या एक दर्जन तक पहुंच गई है। बावजूद इसके ठंड से बचाव के लिए प्रशासनिक इंतजाम नहीं किए गए हैं।
उधर हिमालय में हुई बर्फबारी के बाद पूर्वांचल में भी ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

कोहरे के बाद अब गलन का प्रकोप बढ़ गया है। लगातार गिरते तापमान की वजह से जनजीवन भी अस्त व्यस्त होने लगा है। स्थिति यह है कि रात में तापमान तेजी से गिर जा रहा है।

गुरुवार की सुबह से ही आठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली, लेकिन ठंडी की वजह से हवाएं मानों शरीर में सूई की तरह चुभी। दिन में सूरज निकला लेकिन ठंड का असर कम नहीं हुआ।

 सर्वाधिक दिक्कत बड़े बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों को हुई। स्कूलों में परीक्षा की तैयारियां हो रही है। ऐसे में बच्चों की उपस्थिति भी अनिवार्य है और कंपकपाती ठंड में बच्चों को स्कूल भेजते हुए अभिभावक परेशान हो जा रहे हैं। यही नहीं स्कूलों को बंद करने की भी मांग उठने लगी है।
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ठंड की वजह रूम हीटर, ब्लोअर, और लकड़ी के कोयले की मांग बढ़ गई है। ठंड से  ठंड से बचाव के लिए प्रशासन की ओर से पर्याप्त व्यवस्था न किए जाने से रात में घर से बाहर रहने वालों के लिए मुश्किल हो रही है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी लोग दुबकने को विवश हैं।
 
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