सूबे के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि चंदौली अपनी थाती में तमाम ऐतिहासिक और प्राचीन धरोहरों को समेटे हुए है।
यह
जनपद सभी दृष्टिकोण से अहम हैं। यहां की माटी में भोजपुरी के तुलसी कहे
जाने वाले रामजियावन दास बावला जैसे साहित्यकार ने जन्म लिया।
वहीं कैप्टन
विजय सिंह जैसे वीर सपूत ने भारत की मां की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की
आहुति दी।
ऐसी भूमि पर ‘चन्दौली महोत्सव’ जैसा कार्यक्रम आयोजित करना
सराहनीय है। वे रविवार को पालीटेक्निक कालेज के मैदान पर आयोजित चन्दौली
महोत्सव के समापन पर संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कृषि बाहुल्य
जनपद में प्रतिभाओं की फसल चहुंओर लहलहा रही है, लेकिन वे एक सीमित दायरे
में हैं। इनकी प्रतिभा को मंच और मार्गदर्शन की जरूरत है।
इसकी कमी यह
महोत्सव काफी हद तक पूरी करता है। कहा कि जनपद में राजदरी, देवदरी व
घुरहूपुर को पर्यटन स्थल बनाने के लिए प्रयास जारी है। उन्होंने बताया कि
विदेशी सैलानियों के आगमन में प्रदेश चौथे स्थान पर है। जनपद में भी इनको
आकर्षित करने के लिए प्रयत्न जारी हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की पहचान
कुश्ती और बालीबाल, कबड्डी में रही है, जो अब लुप्त होती जा रही है। इसके
लिए भी हमें मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि चंदौली
महोत्सव जैसे आयोजन होने से प्रतिभाओं को निरंतर मंच मिलता रहेगा। इस अवसर
पर सैनिक शहीदों के पत्नियों व आश्रितों को 11-11 हजार रुपये का चेक प्रदान
किया। साथ ही शिक्षकों को भी सम्मानित किया।
इस दौरान जिलाधिकारी नरेन्द्र
कुमार सिंह ने जिले के विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला और मुख्य अतिथि को
अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया। संचालन डा. धनंजय सिंह व धन्यवाद ज्ञापन
मुख्य विकास अधिकारी जगदीश सिंह ने किया।
देर से शुरू प्रात:कालीन सत्र का
आगाज सानिया मंसूर ने निर्गुण गीत गाकर किया।
कवि सम्मेलन में खूब लगे ठहाके
महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को रात्रिकालीन सत्र में कवि सम्मेलन का
आयोजन किया गया। इसमें जुटे कवियों ने लोगों को खूब हंसाया।
इस अवसर पर
देश भक्ति के साथ-साथ गीत व गजलों की जमकर बयार बही। सम्मेलन का आगाज
संज्ञा तिवारी ने सरस्वती वंदना के साथ किया।
वाराणसी के हास्य कवि
धर्मप्रकाश मिश्र ने बनारसी अंदाज में रचना प्रस्तुत की। मकदुम फूलपुरी ने
कहा कि कुछ भी हो यह मुल्क हमारा अच्छा लगता है, जैसे मां को बच्चा प्यारा
लगता है, यूं तो हैं दुनिया में अनेकों झण्डे लेकिन हमको तिरंगा प्यारा
लगता है।
कमलेश दूबे ने राजनेताओं पर व्यंग्य करते हुए खूब तालियां बटोरी।
वहीं सफलता त्रिपाठी ने पत्नी ने मारी लात कालिदास बन गए, उसने लगाई डांट
तो तुलसीदास बन गए, जैसी रचना सुनाकर खूब ताली बटोरी। झगडू भइया ने कोहवर
का दुल्हा सुनाकर लोगों को लोटपोट कर दिया।
मनमोहन मिश्र ने दुनिया की
रचना के बारे में जिसने सोचा होगा जैसी रचना सुनाकर लोगों को भाई चारे का
संदेश देने का काम किया। राधेश्याम भारती ने जिलाधिकारी की चुटकी लेते हुए
कहा पढ़ लिख कर सरकार के नौकर बन गए, अनपढ़ आवारा होते तो सरकार बन जाते।
पद्म अनबेला ने बुढ़ापे से जुड़ी कई रचनाएं सुनाई और फिल्मी गानों की
बेहतरीन प्रस्तुत की, जिस पर श्रोता लोटपोट हो गए। उन्नाव के फकड़ कवि ने
वीर रस की कविताओं से लोगों को झकझोर दिया। इसके अलावा प्रख्यात कवि
बुद्धिनाथ मिश्र ने भी काव्य पाठ किया। इसके पूर्व कवियों का जिलाधिकारी
द्वारा अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन की
अध्यक्षता जिलाधिकारी एनके सिंह व संचालन प्रख्यात कवि हरीश जी ने किया।