पीडीडीयू नगर में घड़े व सुराही की खरीदारी करते लोग।
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पीडीडीयू नगर। एक दौर था जब गर्मी आते ही ठंडा पानी पीने की चाह में लोग भारी संख्या में घड़े व सुराहियां खरीदते थे लेकिन आधुनिकता के दौर में फ्रिज आने के बाद इनकी मांग काफी कम हो गई है। बावजूद इसके सड़कों के किनारे आज भी घड़े व सुराही बेचने वाले दुकानदार अपनी दुकानें लगाते हैं। कुछ लोग इन्हें स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा लाभदायक मानते हुए इनकी खरीदारी भी करते हैं। गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ नगर में जीटी रोड के किनारे मिट्टी के बने घड़े व सुराहियां बेचने वालों की दुकानें सज गई हैं लेकिन इनपर ग्राहकों संख्या अभी कम है।
इन दिनों शहरी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली का विस्तार हो चुका है। इसके बाद घर-घर में ठंडा पानी के लिए लोग फ्रिज लगाने लगे। इससे मिट्टी से बने घड़ों व सुराहियों की मांग दिन-प्रतिदिन घटती गई। इन दिनों यह स्थिति है कि इनकी मांग नहीं के बराबर हो गई है। पहले लोग ट्रेनों में भी यात्रा के दौरान सुराही लेकर चलते थे लेकिन फिर बोतलबंद पानी का चलन शुरू हुआ तो यह परंपरा भी टूट गई। इससे घड़ों व सुराहियों की बिक्री पर असर पड़ा है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों की आमदनी पर भी इसका असर पड़ा है। इन दिनों बाजार में नल लगा मिट्टी का घड़ा 140-150 व बिना नल लगा घड़ा 100 रुपये प्रति की दर से बिक रहा है। इसके अलावा बालू लगे सुराही की कीमत 50 से 60 रुपये है। घड़े व सुराही बेचने वाले मुन्ना प्रजापति ने बताया कि मिट्टी के घड़े व सुराही मिर्जापुर जिले के अहरौरा से मंगाए जाते हैं। लॉकडाउन के कारण इस वर्ष घड़े व सुराहियों की बिक्री में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है।