पीडीडीयू नगर। लद्दाख की गलवां घाटी में 20 निहत्थे भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद चीन के प्रति लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। आपसी बातचीत सहित सोशल मीडिया पर लोग चीन में उत्पादित वस्तुओं का बहिष्कार करने की मुहिम चला रहे हैं। बाजार में इसका असर दिखने भी लगा है। लोग चीन में बनी वस्तुओं को खरीदने से परहेज कर रहे हैं। इनकी बिक्री में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट आई है।
खिलौनों, मोबाइल के उपकरणों सहित धार्मिक आयोजनों पर बिकने वाली वस्तुओं पर चीन का बाजार हावी हो गया था। सस्ते दर पर मिलने के कारण इन वस्तुओं की जमकर खरीदारी हो रही थी। चीन ने देश के खिलौना बाजार में क्रांति ला दी है। हालांकि इन वस्तुओं को टिकाऊ नहीं माना जाता रहा है, बावजूद इसके आकर्षक होने के कारण इनकी खूब बिक्री हुई।
अब चीन से देश के संबंध खराब होने के बाद लोग वहां की बनी वस्तुओं की खरीदारी करने से कतरा रहे हैं। खिलौनों के विक्रेता मनोज जायसवाल ने कहा कि लद्दाख की घटना के बाद चीन निर्मित वस्तुओं की बिक्री में कमी आई है। पर स्थिति तनावपूर्ण रही तो धीरे-धीरे चीन के बने खिलौनों की मांग समाप्त हो जाएगी। मोबाइल की दुकान चलाने वाले राजकुमार गुप्ता ने बताया कि चीन में बनने वाले मोबाइल हैंडसेट खरीदने से लोग इंकार कर रहे हैं। उन्हें समझाना पड़ रहा है कि कौन सा मोबाइल चीन में बना है और कौन सा नहीं। साइकिल की दुकान चलाने वाले प्रिंस कपूर ने कहा कि साइकिल में हवा भरने वाले पंपों के बाजार पर चीन का एकाधिकार सा हो गया था। अब इनकी मांग घटी है। दुकानदारों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण अभी झालरों सहित अन्य वस्तुओं की बिक्री काफी कम हो रही है। चीन के पांव बाजार से उखाड़ने के लिए देश के उद्योगपतियों को कल-कारखाने लगाने चाहिए जिनमें चीन को टक्कर देने वाली वस्तुओं का उत्पादन हो सके।