पीडीडीयू नगर। कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल बंद हो गये है। इसके चलते बच्चे दिनभर घर पर रह रहे हैं। घर पर रहकर मनोरंजन के लिए बच्चे टीवी या फिर मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं ऑनलाइन कक्षाओं के चलने के कारण भी बच्चों में मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ गया है। डिजिटल इस्तेमाल के बढ़ने के चलते बच्चे एस्थोनोपिक सिम्टम्स का शिकार होने का खतरा बढ़ गया है। इसके तहत बच्चों में धुंधलापन, आंखों के किनारे दर्द, सिर में दर्द, आंखों में पानी का सूखना जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं।
पीडीडीयू नगर निवासी नेत्र विशेषज्ञ डॉ. विपुल केशरी ने बताया कि सामान्य दिनों में बच्चों के लिए मनोरंजन के साधनों में क्रिकेट, फुटबॉल समेत अन्य आउटडोर गेम शामिल हुआ करते थे। मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल कम हुआ करता था। कोरोना संक्रमण के देश में पांव पसारने के बाद लाकडाउन लगाया गया। इसके बाद से बच्चे घरों में कैद हो गये। जिसके बाद से बच्चों में मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी का इस्तेेमाल बढ़ गया। शुरुआती दौर में तनाव, अनिद्रा, आंखों में दर्द, आंखों का लाल होना, धुंधला दिखना इसके शुरुआती लक्षण होते हैं। इसके बाद भी व्यक्ति सचेत नहीं होता है तो उसमें कंप्यूटर विजन सिंड्रोम पनपने लगता है। उन्होंने इससे बचाव के बच्चों को सलाह दी है कि डिजीटल स्क्रीन को आंखों से उचित दूरी पर रखें। बताया कि स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखे, कमरे में पर्याप्त रौशनी होनी चाहिए। बताया कि डिजिटल उपकरणों को देखने के दौरान प्रति मिनट पलकों झपकने की दर में कमी भी आती है। इससे आंखों में सूखापन भी पैदा हो जाता है और पानी में आंखों से पानी भी आने लगता है
।आंखों को आराम दें और करें मसाज
डॉ. विपुल ने बताया कि डिजिटल स्क्रीन पर काम करते समय पलकों झपकाते रहे। साथ ही लगभग एक घंटे तक लगातार इस्तेमाल के बाद पांच से सात मिनट के लिए उपकरण को अपने से दूर कर दें। इसके बाद आंखों को बंद करके उसे धीरे-धीरे मसाज करें । उन्होंने बताया कि स्क्रीन से निकले वाले ब्लू स्पैक्ट्रम को कम करने के लिए बाजार में कई अच्छे क्वालिटी के ग्लास उपलब्ध हैं। उसका इस्तेमाल करें वहीं समस्या अधिक होने पर चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।