पीडीडीयू नगर। चेक क्लोनिंग के माध्यम से स्थानीय नगर पालिका के एकाउंट से 39.55 लाख 321 रुपये निकाल लिए गए हैं। नगर पालिका द्वारा ठेकेदारों को जारी चेक जब बैंक में भुगतान के लिए दिया गया तो पता चला कि इस चेक से पैसा पहले ही निकल चुका है। चेक क्लोनिंग के इस बड़ी घटना से हड़कंप मच गया है। नपा प्रशासन बैंक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में जुटा है।
नगर पालिका प्रशासन का एकाउंट स्टेट बैंक आफ इंडिया की नगर शाखा में है। दो दिन पहले कार्य के बदले ठेकेेदारों को चेक के माध्यम से भुगतान किया गया था। ठेकेदारों ने जब नगर के नई बस्ती स्थित शाखा में चेक क्लीयरेंस के लिए दिया तो पता चला कि प्रस्तुत चेक से पहले ही धन का भुगतान हो चुका है। यह सुनते ही ठेकेेदारों के होश उड़ गए। उन्होंने पालिका प्रशासन से इसकी शिकायत की। पालिका ने जांच की तो पता चला कि चेक क्लोनिंग के माध्यम से उसके एकाउंट से 39 लाख 55 हजार 321 रुपये निकाले जा चुके हैं। पालिका ने स्टेटमेंट निकलवाया तो पता चला कि ठेकेदारों को दिए तीन चेक के साथ पालिका कार्यालय में मौजूद सात अन्य ब्लैंक चेक की क्लोनिंग कर दिल्ली और चेन्नई के एसबीआई की विभिन्न शाखाओं से रुपये निकाले गए हैं। यह पैसा मई माह में ही निकाला गया है। इस संबंध में नपा चेयरमैन संतोष खरवार ने बताया कि बैंक की गड़बडी से पैसे का गबन हुआ है। इस मामले में मुगलसराय कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। वहीं एसबीआई के शाखा प्रबंधक संजय कुमार ने बताया चेक के माध्यम से धन निकासी हुई है। इस मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
पीडीडीयू नगर। चेक क्लोनिंग के माध्यम से नपा के एकाउंट से 39 लाख रुपये निकाले जाने के मामले में कई गड़बड़ झाला भी है। आखिर एक माह पहले जब पैसा निकला तो अब तक पालिका को पता क्यों नहीं चला। वहीं चेक पर बिना ईओ और चेयरमैन के हस्ताक्षर के बिना पैसा नहीं निकल सकता तो आखिर क्लोन चेक पर हस्ताक्षर किसने किए। इसको लेकर नगर में चर्चा है।
नपा ठेकेदारों को सभी तरह के भुगतान चेक के माध्यम से ही करती है। प्रति माह एक तारिख को चेक से किए गए भुगतान का मिलान किया जाता है। बैंक प्रशासन के मुताबिक एकाउंस से 23 मई को चेन्नई और दिल्ली के एसबीआई की शाखा से भुगतान किया गया है। ऐसे में सहज ही सवाल उठता है कि एक जून को मिलान में यह बात सामने क्यों नहीं आई। कहीं ऐसा तो नहीं कि गड़बड़झाला के लिए मिलान ही नहीं किया गया। वहीं नगर पालिका में विभिन्न योजनाओं का संचालन संविदा के आधार पर हो रहा है। इसमें साइबर एक्सपर्ट लोगों की भर्ती की गई है। ऐसे में शक की सुई इनपर भी घूम रही है। बैंक भी आम लोगों को चेक क्लीयरेंस में सुरक्षा के नाम पर खूब परेशान करता है लेकिन इतनी बडी रकम वह भी दूसरे शहरों में कैसे निकाल ली गई। यह बात भी आम लोगों को पच नहीं रही है। कुल मिलाकर इस मिली भगत से गहराई से जांच होने पर ही मामले का खुलासा हो सकता है।
रिपोर्ट और संपादन- कृष्ण मुुरारी मिश्र
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