इन स्थानों पर हुआ पूजन
शनिवार की सुबह से ही गोधन कूटने की तैयारी शुरू हो गई। नगर के कैलाशपुरी, रवि नगर, नई बस्ती, पथरा, लाठ नंबर एक और दो, शाहकुटी, न्यू महाल, काली महाल, चतुर्भुजपुर, इस्टर्न बाजार, मैनाताली, अलीनगर, अमोघपुर, सिकटिया, परशुरामपुर के साथ रेलवे के यूरोपियन कालोनी, मानसनगर, गया कॉलोनी, डीजल कॉलोनी, लोको कॉलोनी, इंडियन इंस्टीट्यूट कॉलोनी, शास्त्री कॉलोनी, आरपीएफ कॉलोनी, प्लांट डिपो, चहनिया के टांडाकला आदि इलाकों में सुबह महिलाओं और युवतियों ने सार्वजनिक स्थान को साफ किया और गोबर से लीपा। इसके बाद गोबर से गोधन की आकृति तैयार की। इसमें यम, यमुना, ओखली, सूप, सर्प आदि की आकृति बनाई।
दोपहर में स्नान ध्यान के बाद महिलाओं ने नारियल, चना, मिठाई से पूजा अर्चना की और इसके बाद मूसल से गोधन कूटा। बाद में भाईयों को प्रसाद स्वरूप इन्हें खिला कर उनकी लंबी उम्र की कामना की। पड़ाव, दुलहीपुर, नियामताबाद, नौग़ढ, सैयदराजा, सकलडीहा, धानापुर, कमालपुर, चहनियां, धीना आदि ग्रामीण इलाको में भी परंपरागत तरीके से भइयादूज मनाया गया।