चहनिया। इन दिनों स्त्रियां फिल्मी गीत गाते या सुनते हुए भोजन बनाती है। इस प्रकार से बना भोजन ठीक नहीं होता है। भोजन बनाते समय स्त्रियों को भगवान के भजन गुनगुनाने चाहिए। भोजन को भगवान का प्रसाद समझकर बनाना चाहिए। इस प्रकार बनाया गया भोजन करने से मन, चित्त, दिल व दिमाग शुद्ध रहता है।
यह बातें कैलावर गांव में चल रहे चतुर्मास यज्ञ के दौरान कथावाचक जीयर स्वामी ने मंगलवार को कहीं। कहा कि खैनी, बीड़ी, गुटखा, शराब, ताड़ी आदि नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों को दान देना नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से दान देने वाला नरक में जाता है। भोजन का महत्व बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि जिस व्यक्ति का आहार, विचार व व्यवहार शुद्ध हो, उसने सभी तीर्थों की यात्रा कर ली हो, उसमें समाज की सेवा की भावना हो और वह शुद्ध व सात्विक भोजन करता हो तो मानो उसने दुनिया के सारे तीर्थों के दर्शन प्राप्त कर लिए हों। कहा कि आहार शुद्ध होने पर अंत:करण शुद्ध होता है। भोजन व व्यवहार से शुद्ध और सदाचार के धनी लोगों के यहां ही देवी निवास करती हैं। इस मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।