31 सदस्यीय गिरोह और 187 करोड़ के लेनदेन की जांच
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में दर्ज गो-तस्करी के एक मुकदमे की विवेचना के दौरान सामने आया कि 31 लोगों का एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह गो-तस्करी में सक्रिय है। जांच में गिरोह के सदस्यों के बीच करीब 187 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन का खुलासा हुआ है। इसी आधार पर मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संगठित अपराध संबंधी धाराएं भी बढ़ाई गईं।
मां के खाते से करीब 59 लाख रुपये का लेनदेन
विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी के बैंकिंग लेनदेन की जांच की। पुलिस का दावा है कि आरोपी का स्वयं का बैंक खाता नहीं था और वह अपनी मां के खाते का उपयोग करता था। जांच में करीब 59.82 लाख रुपये का लेनदेन गो-तस्करी से जुड़े विभिन्न लोगों के साथ होने की बात सामने आई। पुलिस का कहना है कि बैंक विवरण के विश्लेषण से अंतरराज्यीय गो-तस्करी नेटवर्क को आर्थिक सहायता पहुंचाने के संकेत मिले हैं।
पूछताछ में किए कई खुलासे
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले वाहन चालक का काम करता था। बाद में विभिन्न तस्करों के संपर्क में आने के बाद गो-तस्करी करने लगा। उसने यह भी स्वीकार किया कि तस्करी के लिए कई पिकअप वाहनों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस कार्रवाई तेज होने के बाद उसने बैंक खाते के बजाय नकद लेनदेन शुरू कर दिया था। आरोपी ने पूछताछ में यह भी बताया कि बरामद अवैध तमंचा उसने अपनी सुरक्षा के लिए रखा था।
छह मुकदमों में दर्ज है आपराधिक इतिहास
गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध चंदौली, मिर्जापुर समेत विभिन्न जनपदों में गोवध निवारण अधिनियम, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत कुल छह मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अब आरोपी से जुड़े अन्य सदस्यों और वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।