अहंकार रूपी शिवधनुष को विनम्रता रूपी राम ने तोड़ा जिससे पूरे विश्व के अहंकारी राजाओं का मान मर्दन हुआ।
उक्त
विचार स्थानीय काली मंदिर परिसर में देवरहा बाबा सेवा संस्थान के
तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीरामकथा की तीसरी निशा को
संबोधित करते हुए भोपाल मध्यप्रदेश से पधारीं कथा वक्ता साध्वी प्रेमलता
मिश्रा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान राम तथा सीता का मिलन प्रकृति
और पुरुष के मिलन का प्रतीक है जिससे धरती पर आदर्शवाद की उत्पत्ति हुई
तथा दैवी शक्तियां मजबूत हुईं एवं आसुरी शक्तियों का शमन हुआ।
उन्होंने कहा
कि भगवान राम राष्ट्र के प्रतीक हैं तथा सीता संस्कृति की प्रतीक इसलिए
राम विवाह राष्ट्रीय संस्कृति को भी महिमा मंडित करता है।
कथा के दौरान
जीएस सिंह, विजय विश्वकर्मा, मंगला राय, गौरव श्रीवास्तव, भोला मौर्य,
अवधेश प्रधान, भानू प्रताप सिंह सहित तमाम कथा प्रेमी मौजूद रहे। संचालन
सुधाकर कुशवाहा ने किया।