मनरेगा का बजट घटाना, भाजपा शासित राज्याें से मनरेगा के खिलाफ प्रस्ताव लाना, खाद्य सुरक्षा व कैश सब्सिडी के नाम पर राशन में कटौती व सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कमजोर करना, जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें बढ़ाना, बीमा क्षेत्राें में विदेशी पूंजी निवेश लाना।
केंद्र व प्रदेश सरकार की जन विरोधी नीतियों का उदाहरण है। उक्त बातें वाम दलों के संयुक्त राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत कस्बा स्थित यूनियन बैंक के पास आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताआें ने कही।
इस अवसर पर वक्ताआें ने कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार को दूर करने के नाम पर सत्ता में आई मोदी सरकार काले धन के सवाल पर चुप है, ठोस कदम उठाने के बजाय बहानेबाजी में बना रही है।
प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए वक्ताआें ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बेरोजगारी भत्ता, कन्या विद्याधन, लैपटाप वितरण आदि योजनाओं को तो बंद कर दिया, अब गरीब बच्चाें को मिलने वाली छात्रवृत्ति को भी बंद कर दिया है।
जिससे यह साबित होता है कि सपा सरकार पूरी तरह से गरीबों का विरोधी है। वक्ताआें ने कहा कि सपा, भाजपा पूरी तरह से जनविरोधी है। जिसके खिलाफ आने वाले समय में आंदोलन तेज किया जाएगा।
इस दौरान अनिल पासवान, रामअचल यादव, बेचू शर्मा, कैलाश, शंभूनाथ यादव, हौसिला, लालचंद, राजेंद्र आदि लोगों ने संबोधित किया। अध्यक्षता स्वामीनाथ सिंह यादव एवं संचालन जयनाथ ने किया।