या देेवी सर्वभूतेषु .. महामंत्र के साथ पंडालों में स्थापित मां दुर्गा
सहित अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाओं की मनोहर झांकी निहारने के लिए
श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
शाम को पंडालों को देखने के लिए दर्शनार्थियों की कतार लगी। मां के जयकारे से दुर्गा पूजा के पंडाल गूंजते रहे।
तिथियों
के चलते कई पूजा पंडालों में मां की मूर्ति की स्थापना सप्तमी तिथि लगने
पर सोमवार को दोपहर बाद की गई। इस दौरान आदि शक्ति मां दुर्गा, वैभव की
देवी मां लक्ष्मी, ज्ञान दायिनी मां सरस्वती, प्रथम पूज्य भगवान गणेश और
कुमार कार्तिकेय की षोडषोपचार विधि से पूजा अर्चना कर आरती उतारी गई।
इस
वर्ष प्रतिपदा तिथि दो दिन होने और दशमी तिथि की हानि होने की वजह से
दुर्गा पूजा पूजनोत्सव की तिथियों में भी हेरफेर हो गई है।
अधिकतर पंडालों
में तीन दिवसीय दुर्गा पूजनोत्सव के तहत षष्ठी तिथि मानकर रविवार की शाम
पंडालों में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित कर दी गईं, जबकि कुछ पंडालों में
सोमवार को दोपहर में पंडाल स्थापित की गई और पूजन अर्चन शुरू किया गया।
शाम
को विभिन्न पूजा पंडालों के आसपास मेला घूमने वालों की भीड़ उमड़ी। नगर के
इंडियन इंस्टीट्यूट कालोनी, मानसनगर, सेंट्रल कालोनी, गया कालोनी, लाठ
नंबर एक, लाठ नंबर दो में मेला लगा। यहां चाट पकौड़ी की दुकानों के अलावा
झूला लगा। यहां झूला झूलने वालों की कतार लगी।
शाम छह बजे से मेला में भीड़
उमड़नी शुरू हुई, तो भीड़ बढ़ती ही गई।
दर्शनार्थी पास से विशाल पंडालों
को निहारते और चकाचौंध रहे। लाठ नंबर दो और लाठ नंबर एक में चलायमान
मूर्तियों ने लोगों को चमत्कृत किया।
इसी तरह आरपीएफ कालोनी, सिकटिया में
पूजा बाड़ी में भी पंडालों को देखने के लिए भीड़ उमड़ी। विभिन्न पंडालों
में सप्तमी की पूजा मंगलवार को होगी जबकि दशमी तिथि की हानि होने की वजह से
बुधवार को अष्टमी और नवमी की एक साथ पूजा होगी। चंदासी और पड़ाव के
विशालकाय पंडालों को देखने के लिए भीड़ रही।