बस स्टैंड लाइव--
वीरान हुआ बस स्टैंट, लगा गंदगी का अंबार
लॉकडाउन के बाद बदल गई स्थिति, दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
सचित्र-
पीडीडीयू नगर। कभी यहां दिन भर यात्री बसों की चिल्ल पो और यात्रियों के शोर गुल से गुलजार जिले के एकमात्र नगर पं.दीनदयाल उपाध्याय नगर में स्थित रेलवे की भूमि पर संचालित बस स्टैंड की हालत पूरी तरह बदल गई है। साफ सफाई के अभाव में यहां गंदगी का अंबार है और विषैले जंतुुुओं का बसेरा बनने लगा है। कभी यात्रियों से भरा रहने वाला स्टैंड पर रविवार को दोपहर 12.30 बजे पहुंचने पर यहां सन्नाटा पसरा दिखा।
हावड़ा-दिल्ली रूट पर अतिव्यस्त पं.दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से सटाकर रेलवे की भूमि पर पांच दशक पूर्व बस स्टैंड स्थापित किया गया था। जिला स्तरीय स्टैंड न होने की वजह से यही बड़ा स्टैंड है। यहां प्रतिदिन वाराणसी, पड़ाव, रामनगर, चकिया, धानापुर, सकलडीहा, चकिया, नौबतपुर, चहनियां सहित विभिन्न इलाकों के लिए दो दर्जन से अधिक जनर्म बसों का संचालन किया जाता है। प्रतिदिन यहां ढाई से तीन हजार यात्रियों को आवागमन होता है। रेलवे की भूमि पर होने की वजह से इसकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। बावजूद इसके स्टैंड पर दिन भर यात्रियों का कोलाहल होता रहा है। स्टैंड परिसर में किताबों, पान, मिल्क पार्लर, सैलून, भूजा आदि की छह दुकानें संचालित होती हैं। लॉकडाउन लागू होने के बाद 25 मार्च से अब तक एक भी बस स्टैंड पर नहीं आई है। दोपहर 12.30 बजे यहां चिल्ल पो की जगह सन्नाटा दिखा। स्टैंड के पास खड़े एक पुलिसकर्मी ने आवाज दी अंदर कहां जा रहे हैं। नजदीक आकर देखा तो कहा कि स्टैंड पिछले डेढ़ माह से पूरी तरह वीरान है। यहां कोई कर्मचारी भी नहीं आता है। स्टैंड में मिल्क पार्लर चलाने वाले ने कहा कि साफ सफाई न होने की वजह से गंदगी का अंबार है। एक दिन यहां एक अजगर निकल आया था। कहा कि दिन में तो जीटी रोड पर कुछ चलते दिखते हैं लेकिन रात में स्टैंड भूतों का डेरा होता है।
इनसेट-
स्टैंड सें ठेले खोमचे वाले और दुकानदारों की होती थी आमदनी
सचित्र-
पीडीडीयू नगर। बस स्टैंड के संचालित होने से स्टैंड के आस पास ठेला खोमचा लगाकर सामान बेचने वाले और दुकानदारों के साथ रिक्शाचालकों का परिवार चलता था। आज इनके सामने संकट उत्पन्न हो गया है। किराना और जनरल स्टोर संचालक मनीष गुप्ता ने कहा कि बस स्टैंड चलने पर प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आवागमन होता था। ऐसे में दुकान पर हमेशा खरीददारों की भीड़ होती थी। हालांकि सुरक्षा के लिए लॉकडाउन आवश्यक है। इसका अनुपालन किया जा रहा है। फल विक्रेता रामलाल ने कहा कि वे वर्षों से बस स्टैंड के समीप दुकान लगा रहे हैं। वर्तमान में तरबूज बेच रहे हैं। पूर्व में प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये की बिक्री होती थी लेकिन आज तीन से चार सौ रुपये की बिक्री में मुश्किल होती है। बस स्टैंड के समीप क्लीनिक संचालक डॉ. केएन घोष ने बताया कि कभी यहां बाजार गुलजार था लेकिन आज सन्नाटे से डर लगने लगा है। रिक्शा चालक शंकर ने बताया कि लॉकडाउन के बाद कमाई खत्म हो गई है। आज स्थिति यह है कि सुबह से बोहनी तक नहीं हुई। मांग कर खाना पड़ रहा है।
यात्री बसों की आवाजाही और शोर गुल की जगह पसरा है सन्नाटा
साफ सफाई के अभाव में गंदगी का अंबार लगता है भूूतों का डेरा
पहले से बदहाल स्टैंड का लॉकडाउन में मानो खत्म हो गया वजूद