स्थानीय रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या तीन पर बड़ा हादसा होते होते बचा। यहां टूटी हुई पटरी से ही माल लदी मालगाड़ी गुजर गई। यह संयोग ही था कि स्टेशन के एक कर्मी की नजर टूटी हुई पटरी पर पड़ी तो उसने अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद तीन घंटे तक ब्लाक लेकर टूटे पटरी की मरम्मत की गई। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में ट्रेनों के परिचालन पर प्रभाव नहीं पड़ा।
रेलवे में लगातार पिछले दो माह से दुर्घटनाएं हो रही है। अधिकतर दुर्घटनाएं पटरी चटकने और फिस प्लेट टूटने की वजह से ही हुई है। लेकिन रेल प्रशासन पटरियों के रख रखाव पर ध्यान नहीं दे रहा है। ठंडी की वजह से प्लेटफार्म संख्या तीन पर जनाहार के ठीक सामने पटरी टूट गई। दोपहर बारह बजे इस पर एक मालगाड़ी भी गुजरी। मालगाड़ी गुजरने के बाद बाहर निकले कर्मी नीरज कुमार की नजर टूटी हुई पटरी पर पड़ी तो उसने अन्य लोगों को बताया। इसके बाद उसने दौड़ कर टीएक्सआर को बताया। पटरी टूटे होने की खबर होते ही रेलवे के अधिकारियों में खलबली मच गई। आनन फानन में पहले पटरी में एक पट्टी लगाकर जोड़ा गया लेकिन पटरी इतने खतरनाक ढंग से टूटी थी कि यदि इस पर कोई ट्रेन आती तो दुर्घटना होनी निश्चित थी। इसके बाद अधिकारियों ने तीन घंटे के लिए ब्लाक लिया और मरम्मत में जूट गए। इस पर आने वाले ट्रेनों को दूसरे प्लेटफार्म पर लिया गया। इससे परिचालन पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ा।मंडल रेल प्रबंधक किशोर कुमार ने बताया कि पटरी चटकने जांच करायी जाएगी। यदि कर्मचारियों की लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी।