पीडीडीयू नगर। कोयले दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि के चलते जिले में ईंट भट्ठे बंदी की कगार पर पहुंच गये है। भट्ठा संचालकों के अनुसार भट्टे पर काम करने वाले कामगारों के लिए खर्च तक निकालने में परेशानी हो रही है। हालांकि कोयले के विकल्प के रूप में कुछ लोग सरसों की कुड़ी(भू्सी) का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन उससे ईंट की क्वालिटी पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। संचालकों ने कहा कि यदि यही हाल रहा तो आने में समय में या तो ईंट भट्टों को बंद करना पड़ेगा या फिर ईट के दामों में भारी वृद्धि हो जाएगी।
जिलें में कुल 192 ईंट भट्ठो का संचालन होता है। कोयले के मनमाने तरीके से बढ़े दामों के कारण भट्ठा उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हो गया है, वर्तमान में कोयला 18 हजार 500 रुपये टन है। भट्ठा संचालकों के अनुसार कभी आठ हजार रुपये टन बिकने वाले कोयले के दामों में दो गुने की वृद्धि हुई है। जबकि ईंट के दरों में वृद्धि नहीं की गई है। इसके चलते भट्ठा संचालकों को काफी घाटा हो रहा है। कोयले के विकल्प के रूप में ईंट पकाने के लिए कुछ संचालक सरसों की कुड़ी का प्रयोग कर रहे है। कोयले के दामों के वृद्धि को लेकर सरकार की ओर से उचित कदम नहीं उठाये गये तो लोगों के मकान बनवाना काफी महंगा हो सकता है।