पीडीडीयू नगर । बच्चों के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हुई है। इसमें सबसे अधिक चाइल्ड पोर्नोग्राफी के रूप में अपराध बढ़ा है। सीबीआई की ओर से चंदौली में स्पेशल जज पॉक्सो के न्यायालय में दाखिल दो हजार पन्नों की चार्जशीट में जो खुलासे किए गए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। चार्जशीट में सीबीआई ने बताया है कि चंदौली के रहने वाले दोनों आरोपी गरीब बच्चों को निशाना बनाते थे। वीडियो गेम व प्रलोभनों में बच्चों को उलझाकर उनकी पोर्न फिल्म बना लेते थे। बाद में इसे विभिन्न एप के माध्यम से विदेशों में बेचकर मोटी कमाई करते थे।
चंदौली पॉक्सो कोर्ट के विशेष अधिवक्ता शमशेर सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में सीबीआई की टीम ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। बताया बच्चों की पोर्न क्लिप बनाकर उसे बाजार में बेचे जाने की सूचना पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर जांच की शुरू की थी। बताया कि सीबीआई जांच के क्रम में बच्चों की क्लिप को लेकर चंदौली पहुंची और उन मासूमों के परिवार वालों से मुलाकात की और पूरे प्रकरण के बारे में बताया।
शमशेर सिंह ने बताया कि सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, चंदौली के सकलडीहा इलाके के रहने वाले अजय कुमार गुप्ता और धानापुर के आवाजापुर के अविनाश कुमार सिंह गरीब बच्चों को निशाना बनाते थे। बताया कि बच्चों को वीडियो गेम खिलाने के लिए अपने यहां बुलाते थे। इसके बाद जब बच्चें वीडियो गेम खेलने में व्यस्त रहते थे तब ये लोग उनके साथ गलत हरकत कर वीडियो शूट करते थे। बच्चों को इस बात तक की भनक तक नहीं लग पाती थी। कई बार तो गरीब बच्चों को चॉकलेट व अन्य प्रकार प्रलोभन देकर उनके साथ ऐसा गलत कार्य करते थे। चार्जशीट के अनुसार, इन घटनाओं के बारे में बच्चों के अभिभावकों को भी कोई जानकारी नहीं हो पाई थी। बाद में जब परिवार वालों सीबीआई ने क्लिप दिखाई तो उन्हें इसकी जानकारी हुई। सीबीआई ने जांच के दौरान बच्चों से भी आरोपियों की पहचान कराई थी।
पीडीडीयू नगर। जिला चिकित्सालय में कार्यरत मनोचिकित्सक डा. नितेश सिंह ने बताया कि बच्चों के प्रति यौन आकर्षण की बीमारी ‘पीडियोफीलिया’ कहलाती है। यह किसी भी व्यक्ति के लिए खतरनाक हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि चाइल्ड पोर्न देखना उसे अच्छा लग रहा है, तो इसका मलतब है कि वह पीडियोफीलिया से ग्रस्त है। इससे पीड़ित व्यक्ति को किसी मनोवैज्ञानिक से इलाज कराना चाहिए। इसे अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।