जनपद में मकर संक्राति पर्व पारंपरिक ढंग से मनाया गया।
लोगों ने
गुरुवार की भोर में ही गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर तथा तिल और अन्न दान
कर पुण्य लाभ कमाया। इसके अतिरिक्त जगह-जगह प्रसाद के रूप में खिचड़ी का भी
वितरण हुआ। स्नानार्थियों की सर्वाधिक भीड़ पश्चिम वाहिनी गंगा बलुआ घाट
पर रही।
धानापुर क्षेत्र के नरौली, अमादपुर, कमालपुर क्षेत्र के गुरैनी,
जिगना, वीरासराय तथा चहनियां क्षेत्र के रौना, कुरहना, कैली, भूपौली,
सहजौर, तिरगांवा, जूड़ा हरधन, बलुआ घाट, दुलहीपुर क्षेत्र के मवई कला समेत
जनपद के सभी इलाकों में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर तथा अन्न और तिल का
दान किया।
सुदूर ग्रामीण अंचलों में लोगों ने तालाबों और कुओं पर भी स्नान
करने के बाद अन्न दान किया। इसी तरह कमालपुर कस्बा क्षेत्र के गुरैनी गंगा
घाट पर मेला का आयोजन किया गया था। स्नान दान के पश्चात लोगों ने दही,
चूड़ा, तिलकुट आदि ग्रहण किया।
ग्रामीण इलाकों में खिचड़ी के नाम से मशहूर
पर्व पर तिलकुट, चूड़ा, गुड़, लाई, लकड़ा समेत तरह-तरह के गुड़ और चीनी
निर्मित सामान से बाजार पटे रहे। इस संबंध में परमार कटरा के समीप ठेला
लगाकर तिलकुट, लाई और मकर संक्रांति से संबंधित सामान बेचने वाले राकेश ने
बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सभी वस्तुआें की कीमतें कीमतें
बढ़ी हैं।
पिछले वर्ष 40 रुपये प्रति किलोग्राम बिकी लाई इन दिनों 50
से 60 रुपये प्रति किलोग्राम बिकी। इसी तरह पिछले साल गुड़ 32रुपये किलो
था। जबकि इसबार चालीस रुपये रहा।
इसी तरह 24 रुपये की तुलना में 32
रुपये, गड्टा चालीस की बजाय 60, तिलकुट सौ की बजाय 120 रुपये किलो, गजक 120
की बजाय 180 रुपये प्रति किलो तक बिका।