सैयदराजा स्थित यूनियन बैंक शाखा में पैसा निकालने के लिए जुटी भीड़।
नोट बंदी के 25वें दिन भी बैंकों के चेस्ट रूम खाली हैं। कैश की कमी से बैंक लोगों को जरूरत के मुताबिक पैसे नहीं दे रहे हैं। इसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है। शहरी इलाकों में तो स्थिति कुछ सुधरी भी है लेकिन ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में तो स्थिति बदतर ही है। इससे व्यापारी सहित सभी वर्ग परेशान हैं।
नगर के ट्रांसपोर्टर अजय कुमार जायसवाल ने बताया कि नोटबंदी की वजह से एक माह से ट्रांसपोर्टरों के सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। सबसे अधिक समस्या बाजार में करेंसी न होने की वजह से है। नगर के सराफा व्यवसायी राजेश ने बताया कि सरकार के पांच सौ और हजार के नोट बंद करने के फैसला का एक माह पूरा होने वाला है लेकिन अभी तक करेंसी की समस्या हल नहीं हो पाया। इसकी वजह से लोगों को रोजमर्रा के खर्चे निकालने मुश्किल हो गए हैं। सर्वाधिक दिक्कत बाजार में नए नोट न आने की वजह से हो रही है।
सहालग के समय जब पैसे की अधिक आवश्यकता है, ऐसे समय में सरकार को बैंक में तुरंत करेंसी पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। थोक व फुटकर गलला व्यवसायी विभव गुप्ता कहते हैं कि खुदरा पैसा न होने की वजह से लेन देन में दिक्कत हो रही है। छोटे व्यवसायी के पास इतनी हैसियत नहीं है कि वे स्वाइप मशीन आदि खरीद सके। रेवसा निवासी किसानदुखरन राय कहते हैं कि नोटबंदी से धन की कमी से किसानों के सामने अधिक दिक्कत आयी है।