क्षेत्र के रेमा गांव में बनी कच्ची शराब पीकर हृदयपुर नैयापर गांव में दो युवकों की मौत के बाद ग्रामीण लामबंद होने लगे हैं। रेमा गांव के लोगों ने भी शराब के खिलाफ पहल की है। शनिवार को रेमा सहित आस पास के गांवों के लोगों की बैठक हुई। बैठक में शराब बंदी न होने पर ग्रामीणों ने आबकारी और पुलिस प्रशासन की आलोचना की। चेतावनी दी गई कि अब किसी हाल में रेमा सहित आस पास के गांवों में शराब नहीं बनने दी जाएगी। इसके लिए व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
अलीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत रेमा, कठौरी, गुवास, गौसपुर, मनोहरपुर आदि गांव कच्ची शराब बनाने के लिए बदनाम हो चुके हैं। रेमा गांव में तो लगातार छापेमारी के बाद भी इस पर रोक नहीं लगी है। पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में मतदान वाले दिन भी रेमा गांव मे बदस्तूर शराब निर्माण जारी रहा और कच्ची शराब पीने से हृदयपुर के दो युवकों की मौत हो गई, जबकि दो युवक गंभीर रूप से बीमार हो गए। इससे गांव की खूब बदनामी हुई। इससे एक बार फिर ग्रामीणों ने इसके खिलाफ एकजुटता दिखाई है। नवयुवक मंगल दल की देख रेख में पांच गांवों के लोगों की बैठक रेमा स्थित काली मंदिर पर दोपहर में बुलाई गई। बैठक में शराब निर्माण पर रोक लगाने के पीछे आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की नाकामी बतायी बतायी गई। कहा कि पुलिस की शह पर ही शराब निर्माण किया जा रहा है। रेमा गांव में सोनकर बस्ती की सात सौ आबादी है। इसमें करीब पचास लोग शराब बनाते हैं। शराब को नशीला बनाकर उसमें यूरिया और मेंथाल मिलाया जा रहा है। इससे शराब जहरीली हो रही है। पुलिस की मिलीभगत का नतीजा है कि जब भी गांव में छापेमारी होती है इसकी भनक शराब निर्माताओं को पहले ही मिल जाती है। कई बार इसकी शिकायत की गई। एसपी, डीआईजी, आईजी ही नहीं पुलिस महानिदेशक तक को पत्र लिखा गया लेकिन शराब निर्माण पर रोक नहीं लगी। अब जब लोग मरने लगे हैं तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चेतावनी दी कि जल्दी ही शराब बनाने पर रोक लगी तो ग्रामीण सड़क पर उतरेंगे। यही नहीं एक बार फिर से ग्रामीण विरोध में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखेंगे और मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करेंगे। बैठक के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। पंचायत में बिहारी लाल, ओमप्रकाश, राजकुमार, कपिलदेव, भगवानी, मालती देवी, लखपत्ति देवी, संतरा देवी, बच्ची देवी, सोभनाथ चौधरी, राजू, राजकुमार, शैलेष, लवकुश, दिलीप, संतोष, प्रदीप आदि रहे।