एआरटीओ कार्यालय में शनिवार को दस बजे हालात कुछ बदले दिखे। दलाल तो दिखे लेकिन दुबके नजर आए। कार्यालय भी समय से खुल गया और बाबू भी समय से कार्यालय में हाजिर थे। हालांकि लाइसेंस के लिए टोकन कार्यालय साढ़े दस बजे खुला और इसके पहले यहां अभ्यर्थियों की लंबी लाइन लगी रही।
शुक्रवार को अमर उजाला ने उपसंभागीय परिवहन कार्यालय की लाइव रिपोर्ट की थी। इसमें बाबुओं की लेट लतीफी और दलालों का वर्चस्व सामने नजर आया था। शनिवार को जब अखबार की टीम 09-50 बजे एआरटीओ कार्यालय पहुुंची तो यहां कार्यालय का ताला खुल चुका था। स्वागत कक्ष का ताला खुला रहा लेकिन इस पर कोई बैठा नहीं था। रूम नंबर एक प्रवर्तन और पंजीयन कार्यालय में कर्मचारी शेखर श्रीवास्तव, कृष्ण कुमार दुबे, अनिल कुमार सिंह द्वितीय, लालधर गोंड और रमेश कुमार शर्मा बारी-बारी से दस बजे तक पहुंच गए। इसी तरह रूम नंबर दो के रोड टैक्स शाखा में कर्मचारी अर्जुन सिंह यादव, अनिल कुमार सिंह प्रथम, अजय सिंह, उपेन्द्र दुबे आदि भी 10 बजकर 05 मिनट तक पहुंच गए। हां लाइसेंस अनुभाग कार्यालय का ताला दस बजकर 27 मिनट पर खुला। पता चला कि यहां के बाबू राम कुंवर खरवार पैर में लगी चोट की वजह से ड्रेसिंग कराकर आ रहे हैं। हालांकि इसके पूर्व छह से सात अभ्यर्थी लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंच चुके थे। वहीं बायोमेट्रिक पहचान के लिए कार्यालय भी समय से खुला था और बाबू लोग मौजूद रहे। सर्वर भी साढ़े दस बजे तक खुल गया। लिपिकों ने काम शुरू कर दिया। बाहर दलाल भी घूमते रहे लेकिन वे मीडिया को देख कर छिपते रहे।