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स्वास्थ्य विभाग की टीम के वापस लौटने से ग्रामीणों में रोष

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धानापुर विकास खंड क्षेत्र के नेकनामपुर के ग्रामीण पिछले 10 दिनों से डायरिया से त्रस्त हैं। डायरिया की चपेट में आने से एक महिला की शनिवार को मौत भी हो चुकी है। डायरिया फैलने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली और रविवार तक तीन दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्यों ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच करने के साथ उनमें दवा का वितरण किया। टीम के रविवार को वापस लौट जाने से ग्रामीणों में रोष है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में गंदगी का अंबार है। बीमारी के पांव पसारने के बाद भी गांव में न तो साफ-सफाई कराई गई है और न ही दवा का छिड़काव किया गया है। कहा कि डायरिया से गांव पूरी तरह से उबर नहीं सका है। अभी भी कई लोगों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग को पहले ही जानकारी दी गई लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। ऐसे में ग्रामीण इलाज के लिए आस-पास के निजी चिकित्सालयों में इलाज कराने को विवश हो गए। डायरिया की चपेट में आने से गांव के जितेंद्र गिरी की पत्नी प्रीति गिरी (32) की मौत हो गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली। अभी भी गांव के दर्जनों लोग मोहरगंज, चहनिया सहित वाराणसी के अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। ग्रामीणों के मन से डायरिया का भय अभी भी नहीं निकला है। ग्राम प्रधान बृजेश यादव ने कहा कि ब्लिचिंग पाउड़र के छिड़काव के लिए चिकित्सा विभाग से बात हुई तो उन्होने कार्य को आशा के जिम्मे लगा दिया। वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. जेपी गुप्ता नें कहा कि डायरिया से अब लोगों को काफी राहत है। गांव में तीन दिनों तक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दवा बांटी है।
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