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टिड्यिों के दल से बचाव के लिए कृषि अधिकारियों ने दिया सुझाव

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चंदौली। गर्मी के मौसम में सब्जियों तथा अन्य फसल की खेती करने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योकि राजस्थान और पंजाब के कुछ हिस्से से टिड्यिों का दल सूबे के झांसी और ललितपुर जिले में फसलों को बर्बाद कर चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों को अनुमान है कि पूर्वांचल के जिलों में भी इनका प्रकोप हो सकता है । ऐसे में अधिकारियों ने लेखपालों, प्राविधिक सहायकों के माध्यम से टिड्यिों के प्रकोप की सूचना देने का निर्देश दिया है। साथ ही फसल पर दवाओं के छिड़काव तथा खाली पड़े खेत की जुताई करके सिंचाई करने का सुझाव दिया है।
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राजस्थान एवं पंजाब के कुछ क्षेत्रों में टिड्डी के प्रकोप के चलते बार्डर वाले जिलों में टिड्डी के प्रकोप की संभावना बढ़ गयी है। वर्तमान में टिड्डी दल सूबे के झांसी, ललितपुर एवं हमीरपुर जिले में फसलों को अपनी चपेट में ले चुका हैं। टिड्डी दल का प्रकोप महामारी स्वरूप ग्रहण कर लेता है। इससे बचने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को टिड्डी के प्रकोप को रोकने के लिए टीन के डब्बों, थालियों आदि को बजाते हुए शोर मचाने का सुझाव दिया है। कृषि विभाग के अनुसार बलुई मिट्टी टिड्डी के प्रजनन एवं अंडे देने हेतु सर्वाधिक अनुकूल होता है। ऐसे में किसान टिड्डी दल के आक्रमण से संभावित ऐसी मिट्टी वाले क्षेत्रों में खेतों की जुताई कराने के बाद जल भराव करवा दें। इससे टिड्डी के विकास की संभावना कम हो जाती है। वहीं फसलों और सब्जियों पर क्लोरपाइरीफॉस या लैमडासाईहैलोथ्रिन का तीव्र छिड़काव करके बचाव कर सकते हैं। कृषि रक्षा अधिकारी अमित जायसवाल ने बताया कि इनके प्रकोप को रोकने के लिए किसान दवा का छिड़काव कर सकते है।
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