सूजाबाद निवासी एवं चंदौली के जिला परियोजना अधिकारी दर्शन निषाद ने बताया कि वह सुबह गंगा स्नान के लिए जा रहे थे, तभी उन्हें मछुआरों से शिवलिंग मिलने की सूचना मिली। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से शिवलिंग को बाहर निकलवाया गया और मंदिर तक पहुंचाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार शिवलिंग काले पत्थर से निर्मित है, जो नेपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी बनावट और नक्काशी वर्तमान समय के शिवलिंगों से अलग दिखाई देती है। संभावना जताई जा रही है कि किसी प्राचीन मंदिर के बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदा में क्षतिग्रस्त होने के बाद यह शिवलिंग गंगा की धारा में बहते हुए यहां पहुंच गया हो।
घटना की सूचना पुरातत्व विभाग को दे दी गई है। विभागीय जांच और अध्ययन के बाद ही शिवलिंग की वास्तविक आयु, ऐतिहासिक महत्व और मूल स्थान के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।