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Chandauli News: तहसील तो बनी, लेकिन न्याय अब भी 40 किमी दूर

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नौगढ़। तहसील का दर्जा मिलने के एक दशक बाद भी नौगढ़ न्यायिक सुविधाओं के मामले में अधूरा है। मुंसिफ कोर्ट, ग्राम न्यायालय, चकबंदी न्यायालय, रिकॉर्ड रूम और अन्य आवश्यक न्यायिक व्यवस्थाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। इसका खामियाजा क्षेत्र के एक लाख से अधिक लोगों को भुगतना पड़ रहा है। छोटे-बड़े न्यायिक कार्यों के लिए आज भी लोगों को 36 से 40 किलोमीटर दूर चकिया जाना पड़ता है।
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नौगढ़ तहसील बनने से लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासनिक के साथ-साथ न्यायिक सुविधाएं भी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी, लेकिन दस वर्ष बीत जाने के बाद भी यह सपना अधूरा है। जमीन की रजिस्ट्री, बैनामा, न्यायालयी अभिलेखों की जरूरत, जमानत और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं के लिए वादकारियों को बार-बार चकिया का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी हो रही है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामचंद्र यादव ने बताया कि नौगढ़ तहसील क्षेत्र की आबादी एक लाख से अधिक है। इसके बावजूद यहां ग्राम न्यायालय, मुंसिफ कोर्ट और मजिस्ट्रेट कोर्ट की स्थापना नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि तहसील में उप जिलाधिकारी और तहसीलदार न्यायालय तो संचालित हो रहे हैं लेकिन अभिलेख कक्ष आज भी चकिया में होने के कारण मुकदमों से जुड़े अभिलेखों के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। चकबंदी न्यायालय की स्थापना भी अब तक नहीं हो सकी है। इससे भूमि विवादों के मामलों में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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