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अफसरों को वादाखिलाफी की दिलाई याद

Wed, 21 May 2014 05:30 AM IST
Chandauli
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शिकारगंज। नक्सल प्रभावित क्षेत्र मुबारकपुर के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं को लेकर मंगलवार को तहसील दिवस पर चकिया धमक पड़े। यहां उन्होंने एसडीएम बसंत लाल गुप्ता और तहसीलदार संजय सिंह को चुनाव के दौरान काली मंदिर पर खाई गई कसमों की याद दिलाई। जिस पर एसडीएम ने पेयजल की व्यवस्था गांव में मुहैया कराने के लिए जलनिगम के एसडीओ वाराणसी विशाल आर्या से मोबाइल पर बातचीत की। साथ ही पांच दिन के अंदर रिपोर्ट प्रेषित करने के साथ ही पानी की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। दरअसल उस वक्त ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाएं न मिलने पर मतदान बहिष्कार की चेतावनी दी थी। तब अफसरों ने उनको समस्याएं हल कराने की शपथ खाई थी। जिसके बाद लोगों ने बहिष्कार वापस ले लिया था।
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गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के हिनौती दक्षिणी ग्राम पंचायत और मुबारकपुर गांव में आज तक बिजली, पानी, सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। ग्रामीणों ने मौलिक सुविधाएं मुहैया कराने के संबंध में बीते 22 अप्रैल को एसडीएम को पत्रक दिया था और साथ ही समस्याओं का निराकरण न होने पर मतदान बहिष्कार की भी चेतावनी दी थी। लेकिन चुनाव के चलते अधिकारियों ने ग्रामीणों के पत्रक को ठंडे बस्ते में डाल दिया। तत्पश्चात ग्रामीणों द्वारा मतदान बहिष्कार की समाचार पत्रों में छपी खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद डीएम ने बीडीओ और कोतवाल चकिया को गांव जाकर ग्रामीणों की समस्याओं से रूबरू होने का निर्देश दिया। बावजूद इसके अधिकारी गांव में नहीं गए। जिससे ग्रामीण खफा हो गए। तत्पश्चात 16 मई को चुनाव के दिन मतदान बहिष्कार का निर्णय लेकर गांव स्थित काली मंदिर पर एकत्रित हो गए।
इसकी सूचना सूचना मिलते ही बूथ संख्या 224 मुबारकपुर में एसडीएम और तहसीलदार पहुंच गए। मतदान केंद्र का जायजा लेने के बाद काली मंदिर पर एकत्रित ग्रामीणों से वोट देने के लिए आग्रह किया। लेकिन नाराज ग्रामीण तैयार नहीं हुए। अंततोगत्वा तहसीलदार संजय सिंह ने चुनाव बाद 19 मई को डीएम को साथ लेकर गांव में आकर चौपाल लगाने की काली मंदिर कसम खाकर भरोसा दिलाया। तब जाकर करीब पांच घंटे बाद लोगों ने वोट देना शुरू किया। लेकिन जब 19 मई बीत गया और कोई भी गांव में नहीं आया तो ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट पड़ा और वे मंगलवार को तहसील दिवस पर चकिया तहसील पहुंच गए। इस दौरान चंद्रभान साहनी, दशरथ सिंह यादव, अशोक कुमार, शिवकुमार विश्वकर्मा, प्रदीप कुमार, राजेश यादव, दिनेश साहनी, विजयशंकर यादव, कमलेश कुमार, अनिल कुमार आदि ग्रामीण शामिल रहे।
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फोटो दो
तहसील दिवस में कुर्सियां रही खाली
36 विभागों से सिर्फ 12 विभागों के अधिकारी ही आए
चकिया। लोकसभा चुनाव के बाद मंगलवार को चकिया तहसील सभागार में आयोजित तहसील दिवस में अधिकारियों की गैर मौजूदगी से तहसील दिवस फीका रहा। तहसील दिवस में अफसरों की अनुपस्थिति का यह आलम रहा कि 36 विभागों में से सिर्फ 12 विभागों के अफसर ही मौजूद रहे। जिससे नाराज एसडीएम ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी है। तहसील दिवस में पांच विभागों बंधी डिवीजन, पीडब्ल्यूडी, चंद्रप्रभा प्रखंड, लघुडाल और नलकूप विभाग के अधिकारी अनुपस्थित रहे, तो चकिया, नौगढ़, इलिया, बबुरी और शहाबगंज में सिर्फ शहाबगंज के एसओ ही मौजूद थे। वहीं नगर पंचायत खंड विकास अधिकारी और तीनों विकास खंडों के बाल विकास परियोजना अधिकारी भी अनुपस्थित रहे। अधिकारियों की गैर मौजूदगी के बावजूद तहसील दिवस में आए फरियादियों ने सात प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन निस्तारण किसी का भी नहीं हो सका। अध्यक्षता एसडीएम बसंत लाल गुप्ता ने की।

सात प्रार्थनापत्रों में किसी का नहीं हुआ निस्तारण
सकलडीहा। लोकसभा चुनाव बाद मंगलवार को आयोजित तहसील दिवस में सिर्फ खानापूर्ति की गयी। सूचना के बाद भी अधिकारियों की उपस्थिति नहीं हो पाई थी। तहसील दिवस में कुल सात प्रार्थना पत्र पड़े, मौके पर एक का भी निस्तारण नहीं हो पाया।
मंगलवार को आयेाजित तहसील दिवस की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी जितेन्द्र मोहन सिंह ने किया। सुबह दस से अपहृान दो बजे तक चले तहसील दिवस में चक्कबंदी,हैंडपम्प,बिजली व पुलिस से सम्बधित फरियादियों ने प्रार्थना पत्र दिया । विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण किसी भी प्रार्थनापत्र का मौके पर निस्तारण नहीं हो पाया। तहसील दिवस में उपजिलाधिकारी जितेन्द्र मोहन सिंह,नायब तहसीलदार भरत लाल श्रीवास्तव,खंड शिक्षा अधिकारी अमित दूबे, सीडीपीओ सरोज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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