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जनपद की पहचान बनेगा ब्लैक राइस: डीएम

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चंदौली। धान के कटोरे की पहचान विश्व पटल पर हो, इसके लिए कृषि विभाग के सहयोग से ब्लैक राइस (काला भात) की ब्रांडिंग कराई जाएगी। एक जनपद-एक उत्पाद के तहत भी इसे चयनित कराने के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा। आगामी खरीफ के सीजन में एक हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर ब्लैक राइस की खेती होगी। गुरुवार को जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल केवीके सभागार में आयोजित नमामि गंगे योजना के तहत काला धान जैविक खेती और कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों और कृषि अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
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कार्यशाला के दौरान डीएम ने काले धान के इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि तीन सौ वर्ष पहले चीन के हान साम्राज्य में इस धान को केवल राजघराने में ही खाने में प्रयोग किया जाता था। इस धान को राजाओं का धान अथवा फारबिडेन राइस कहा जाता है। कहा कि अन्य चावलों से तुलनात्मक ब्लैक राइस में प्रोटीन, फाइबर व आयरन के अंश हैं। ब्लैक राइस का स्वास्थ्य में लाभदायक होने के साथ ही कैंसर रोधी और एंटी डाइवेटिक है। कहा कि किसानों की आय दुगुनी करने के लिए यह धान काफी उपयोगी साबित होगा। धान की गुणवत्ता परीक्षण कराने के लिए सैंपल को हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। इसके बाद इसकी खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा और जनपद की पहचान बनाने के लिए ब्रांडिंग भी होगी। इस दौरान उप कृषि निदेशक विजय सिंह, कृषि वैज्ञानिक आरपीएस रघुबंशी, जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार भारती, कृषि रक्षा अधिकारी अमित जायसवाल और किसान उपस्थित रहे।
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