चंदौली। स्वच्छता अभियान की मुहिम को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जागरूकता कार्यक्रम से लेकर मानीटरिंग कराई जा रही है। इसके बावजूद योजना जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। गांव-गांव में बन रखे शौचालय की देखभाल एवं खुले में शौच रोकने के निगरानी टीम बनाई गई है। इस पर लाखों रुपये निगरानी टीम पर प्रशासन ने खर्च कर दिए मगर हालात जस के तस है। अब भी लोग धड़ल्ले से खुले में शौच करने जा रहे हैं। निगरानी टीम कागजों तक सिमट कर रह गई।
जनपद में कुल 734 ग्राम पंचायत और लगभग 1600 से अधिक गांव है। सभी ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त रखने के लिए स्वच्छता ग्राही व निगरानी टीम का गठन किया गया है। इसमें ग्राम प्रधान को अध्यक्ष व 12 सदस्य शामिल है। सभी ग्राम पंचायतों में 540 स्वच्छता ग्राही नियुक्त किए गए है। इसमें सफाई कर्मी भी शामिल हैं, ताकि गांवों के लोगों को जागरूक करके खुले में शौच से मुक्ति दिला जाए। इसके बाद भी खुले में शौच पर रोक नहीं लग पा रहा है।
टीम के सदस्यों की अलग पहचान
गांव को स्वच्छ बनाए रखने के लिए इस टीम के सदस्यों की अलग पहचान के लिए नीले रंग का ड्रेस दिया गया है। कोई ग्रामवासी खुले में शौच करते दिख जाता है तो , तो उसे सीटी बजाकर आगाह करते हैं। नहीं मानने पर पंचायत द्वारा उक्त ग्रामीण को 500 रुपये अर्थदण्ड लिया जाता है और यह राशि पंचायत के स्वच्छता फंड में जमा की जाती है। सभी विकास खंड के सभी गांवों में ऐसी टीम गठित की गई है, जिसकी बैठक हर माह की 10 तारीख को होती है और उसमें सभी गांवों की स्वच्छता की स्थिति पर विमर्श होता है।
अभी तक नहीं मिला मानदेय
जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार का कहना कि मानदेय नहीं मिलने के कारण स्वच्छता ग्राहियों को पेरशानी हो रही है। स्वच्छताग्रहियों ने ही मानदेय के लिए कई बार आंदोलन भी किया, लेकिन उनकी मांगों को शासन व प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं दिया गया। इससे गांवों में निगरानी टीम कमजोर हुई है।
कोट---
ग्रामीणों को खुले में शौच नहीं करने के लिए गांवों में निगरानी समिति का गठन किया गया है। समितियां पूरी तरह से लोगों को जागरूक कर रही है। जहां समितियों की सक्रियता कम है वहां नये समिति का गठन कर लोगों को खुले में शौच न करने के लिए जागरूक किया जाएगा। उमाशंकर मिश्र, डीपीआरओ ।