कंदवा। अमड़ा प्राथमिक विद्यालय में शुक्रवार की रात युवक मंगलदल और रामलीला समिति की ओर से ‘अपना-पराया’ नाटक का मंचन किया गया। इसमें टूटते परिवारों और बुजुर्गों की उपेक्षा का दर्द दर्शाया गया। कलाकारों ने नाटक के माध्यम से परिवार पर पड़ रहे पाश्चात्य संस्कृति के कुप्रभाव को दर्शाया।
इस नाटक के माध्यम से यह भी दिखाया गया कि गाड़ी, बंगला और धन की लोलुपता इंसान को अपनों से दूर करती जा रही है। संस्कृति और सम्मान पीछे छूटता जा रहा है। नाटक में बेटे को देखते ही मां खुशी से फूली नहीं समायी और उसे अपने पास आने के लिए बुलाती है। शादीशुदा बेटा मां को इंतजार करने के लिए कहता है और घर से निकल जाता है। दुखियारी मां फूट-फूट कर रोना शुरू करती है तो दर्शकों की भी आंखें नम हो जाती हैं। नाटक में कलाकारों ने दिखाया कि आज की चकाचौंध भरी दुनिया में अपनी ही संतान अपने मां-बाप को बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं और बुजुर्गों को आखिरी पड़ाव पर अपना ही घर पराया सा लगने लगता है। कलाकारों में शिवकांत सिंह, धनंजय सिंह , दिग्विजय सिंह ,धीरज सिंह, पवन ,ईश्वर शरण, अनूप, राजेश ने नाटक में दमदार किरदार निभाया। ब्यूरो