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लीफ-कलर-चार्ट से अब निर्धारित होगी यूरिया की मात्रा

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चकिया। अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला (फिलीपिंस) द्वारा खेतों में धान के फसल के रंग के आधार पर यूरिया के प्रयोग के लिए लीफ-कलर-चार्ट लांच किया है। इसे धान के कटोरे में लागू करने की योजना कृषि वैज्ञानिक बना रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यूरिया के अधिक प्रयोग से धान के उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है तथा किसानों की लागत बढ़ जाती है।
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धान के फसल में यूरिया का प्रयोग नियंत्रित करने के उद्देश्य से लीफ-कलर-चार्ट का निर्माण किया गया है। बच्चों के कलर बाक्स की तरह के इस चार्ट में डार्क ग्रीन, ग्रीन, धानी कलर तथा एलोग्रीन के कलर बने हुए हैं। खेतो में धान की पत्तियों के रंग को इन रंगो से मिलान कराने पर यदि पत्तियां डार्क ग्रीन है तो खेतों में यूरिया की मात्रा कम प्रयोग करने, ग्रीन है तो उससे अधिक करने, धानी है तो उससे अधिक करने तथा एलोग्रीन है तो सबसे अधिक करने की सलाह दी गई है। लीफ-कलर-चार्ट के कलर के हिसाब से प्रति हेक्टेयर यूरिया की मात्रा निर्धारित की गई है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक तथा प्रसिद्ध चावल वैज्ञानिक प्रोफेसर आरपी सिंह ने बताया कि लीफ-कलर-चार्ट के आधार पर यूरिया का प्रयोग कर किसान अपना उत्पादन बढ़ा सकते हैं तथा लागत भी कम कर सकते है। उन्होंने कहा कि धान के कटोरे में शीघ्र ही लीफ-कलर-चार्ट को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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