मुगलसराय । करीब सात दशक पूर्व बना नगर पालिका परिषद कार्यालय जर्जर अवस्था में होता जा रहा है। भवन से जगह छतो से छप्पर टूट रहे हैं तो छतो की सिलाब की छड़े भी जंग खा चुकी है। वहीं कमरे में सीलन इतनी की वहां कार्य करना भी मुश्किल हो । यहां पालिका अंतर्गत आने वाले कई विभागों के कार्यालय मौजूद हैं। साथ ही सौ से अधिक कर्मचारी कार्यरत है । यहां तक कार्यालय के मेन गेट की हालत कमजोर हो चुकी हैं जबकि अब तक पांच जनप्रतिनिधि बोर्ड का गठन हो चुका हैं । लेकिन किसी ने भी इसकी मरम्त कराने या फिर नया पालिका कार्यालय बनाने का प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा ।
नगर के नागरिकों को बहेतर सुविधाएं देने व विकास करने के लिए नगर पालिका का गठन किया गया । सन 1958 में शहर के बीचो बीच नगर पालिका कार्यालय भवन का निर्माण कराया गया था । इस कार्यालय में कई विभागीय कार्यालय चलते हैं। इस दो मंजिल कार्यालय में कई विभागीय कार्यालय चलते हैैं । इस दो मंजिले कार्यालीय इमारत में छोटे -छोटे कई कमरें बने हैं। कार्यालय के द्वितीय तल की स्थिति काफी खराब है हो चुकी है । एक तरफ जहां छातो के छप्पर टूट कर गिरते हैं तो गलियारा दलदली हो चुका है। ईंट गारे के बने इस भवन की अवधि भी लगभग समाप्त हो चुकी है। इसके पहले 1995 में कार्यालय को चंदासी के पास स्थानांतरित करने की योजना तत्कालीन चेयरमैन सरस्वती देवी चौहान के समय बनाई गई थी । जिसका शिलान्यास उस समय मुख्यमंत्री रहे ल्याण सिंह ने किया था लेकिन कुछ विवादों के कारण वहां कार्यालय नहीं बन सका । नगर पालिका जच्चा बच्चा केन्द्र तोड़कर शापिंग काम्पलैक्स बनवा चुकी है जबकि आयुर्वेदिक चिकित्सालय तोड़कर नया भवन तैयार हो चुका है लेकिन अपने ही कार्यालय के जर्जर हो रहे भवन को दुरुस्त करने की कोई इंतेजाम नहीं है। कई जन प्रतिनिधि बोर्ड गठित हो चुकी है। सभी ने इस भवन के निर्माण के लिए कोई योजना नहीं है । बल्कि अपने ही संबंद्ध दूसरे संस्थान जो कि मरम्मत पर विशेष ध्यान दिया गया है। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक जानते हैं कि यह भवन जर्जर हो रहा है लेकिन इसके नवीनीकरण के लिए कोई प्रस्ताव नहीं बनाया जा रहा है । देखना है कि नया जनप्रतिनिधि बोर्ड कोई योजना बनाता है या नहीं । जबकि नवनिर्वाचित चेयरमैन सत्ताधारी दल से जुड़ा है।