चहनियां। क्षेत्र के बलुआ स्थित पक्का पुल के नामकरण का मामला गर्माता जा रहा है। बुधवार को दर्जनों की सख्या में ग्रामीणों ने पुल का नामकरण महर्षि बाल्मिकि सेतू करने की मांग को लेकर पुल के समीप अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गए। चेताया कि पुल के नामकरण के घोषण तक ग्रामीण धरने पर बैठे रहेगे। वही स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर उदाशिनता का भी आरोप लगाया।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि बलुआ महर्षि बाल्मिकि की तपोस्थली रही है और इस क्षेत्र के लोगों की पहचान उन्ही से जुड़ी है। कहा कि बलुआ स्थित बाल्मिकि आश्रम पर गंगा नदी पश्चिम दिशा में हुई है और मौनी अमवस्या पर लाखो श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान करने के बाद बाल्मिकि आश्रम में दर्शन और पूजा पाठ करते है। कहा कि सरकार द्वारा लाखो लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पुल का नाम महर्षि बाल्मिकि के नाम पर करना चाहिए। चेताया कि सरकार द्वारा पुल के नामकरण की घोषणा किए जाने के बाद ही वें लोग धरना समाप्त करेंगे। चेताया कि अगर सरकार लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने का कोशिश करेगी तो ग्रामीण धरने को और धार देगे। कहा कि पुल के नामकरण में सत्ता पक्ष से जुड़े जनप्रतिनिधियों को पहल करना चाहिए। इस दौरान पंकज सिंह, घनश्याम चौरसिया, जगदीश मिश्रा, बाबूराम यादव, आशीष पासवान, रमन माझी, नीरज माझी, सरवन माझी, आकाश माझी, शुभम माझी, सतीश माझी, शुभम माझी, अंकित जायसवाल, विशाल गुप्ता, रितेश माझी, राजेश सोनकर, किशन माझी, सूरज माझी, मनोज माझी, संदीप माझी, गोविंद माझी, गोलू माझी आदि मौजूद रहे।