फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandauli News: 68 मृतक दे रहे थे वोट, 350 लोगों के दो-दो बार हैं नाम, 26 बाहरी मतदाता

विज्ञापन
दुलहीपुर के सतपोखरी में खुली बैठक में शामिल ग्रामीण। स्रोत:-जागरूक पाठक
विज्ञापन
दुलहीपुर। नियामताबाद विकासखंड की सतपोखरी ग्राम पंचायत में मतदाता सूची की जांच में फर्जीवाड़ा मिला है। तीन दिनों तक चली खुली बैठक और जांच में पाया गया कि पंचायत की मतदाता सूची में 68 ऐसे व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं, जिनकी मृत्यु पांच वर्ष से भी ज्यादा पहले हो चुकी है। इसके अलावा 350 मतदाताओं के नाम दो बार दर्ज मिले। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वाराणसी सहित अन्य स्थानों के 26 ऐसे व्यक्तियों के नाम भी सतपोखरी की मतदाता सूची में दर्ज हैं, जिनका गांव से कोई संबंध नहीं है। जांच में कुल 1000 फर्जी मतदाता मिलने की पुष्टि हुई है।
विज्ञापन

सतपोखरी निवासी और पूर्व प्रधान प्रत्याशी परवेज ने पंचायत की मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर उपजिलाधिकारी अनुपम मिश्र से शिकायत की थी। परवेज की मां पहले सतपोखरी से बीडीसी सदस्य भी रह चुकी हैं। उन्होंने शिकायत की थी कि पंचायत के मतदाता सूची में सैकड़ों नाम बनारस के लोगों के हैं। प्रधान ने अपने रिश्तेदारों के नाम चढ़वाए हैं।
इसके साथ ही उन लोगों के नाम भी अभी मौजूद हैं जिनकी मृत्यु पहले हो चुकी है। उनके नाम पर भी हर बार चुनाव में वोट पड़ते हैं और फर्जीवाड़ा होता है। शिकायत के बाद डीएम चंद्रमोहन गर्ग के निर्देश पर 30 दिसंबर को जब जांच टीम गांव पहुंची, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। नाम काटने पर आक्रोशित ग्रामीणों के दो पक्षों में मारपीट तक हो गई। मौके पर पहुंचे एसडीएम अनुपम मिश्र और सीओ कृष्णमुरारी मिश्र ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए जांच कार्य को शांतिपूर्ण ढंग करने देने की चेतावनी दी। ज
विज्ञापन

िसके बाद जांच खुली बैठक में शुरू हुई फर्जीवाड़ा सामने आया। यह बात सामने आई कि सतपोखरी ग्राम पंचायत के कुल 14 हजार मतदाताओं में एक हजार मतदाताओं के नाम फर्जी तरीके से चढ़े हैं।
इनमें 68 मृतक है जिनका नाम काटा नहीं गया है। वहीं 350 लोगों के नाम दो-दो बार हैं। इसमें 26 ऐसे लोग मिले जो बनारस और अन्य जगहों के निवासी थी।
जांच टीम में बीडीओ शरदचंद्र शुक्ला, राजस्व कर्मचारी सलमान खान, पंकज सिंह, सूजीत कुमार यादव, अमरेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। जांच के दौरान ग्रामीणों की सहभागिता भी रही, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सकी। जांच पूरी होने के बाद सामने आए तथ्यों ने प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीण भी चौंक गए। अब उम्मीद है कि पंचायत चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें