मुगलसराय। आंखो में काम मिलने की आशा, खाने के लिए किसी के पास आचार रोटी तो किसी के पास चावल दाल, किसी के पास लिट्टी मिर्चा प्याज। काम के इंतजार में सुबह गल्लामंडी चौराहे, चकिया तिराहे, सब्जी मंडी मोड़ पर ठेकेदार व मालिक बैठे रहते हैं मजदूर। काम न मिलने पर घर वापसी। प्रतिदिन की यह बेबसी सैकड़ों मजदूर परिवार के घर फाकाकशी के दरवाजे खोल रही है। जी हां यह तस्वीर है प्रतिदिन धान के कटोरे के रूप में विख्यात जनपद चंदौली के मिनी महानगर की जहां प्रतिदिन काम की तलाश में मजदूर आते हैं। लेकिन काम न मिलने से बैरंग वापस लौट जाते हैं।
मुगलसराय जनपद का सबसे बड़ा शहरी इलाका है। यहां प्लंबर, राजमिस्त्री, से लेकर कारपेंटर आदि कार्य करने वाले सैकड़ों लोग अपने-अपने ठीहे पर आते हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या ऐसे मजदूरों की होती है जो दिनभर ईंट, बालू, ढोने के साथ राजगीर मिस्त्री के साथ कार्य करने वाले होते हैं। सुबह होते ही मंडी में मजदूर आ जाते हैं और काम का इंतजार करते हैं पर काम नहीं । सरकार की नीतियों के मजदूर के पेट पर लात पड़नी आरंभ हो गई है। पहले नोटबंदी, फिर रुपयों की कमी, बेनामी संपत्ति के अलावा बिल्डरों के यहां काम में मंदी। खनन व बालू पर रोक उपजी मंहगाई से लोग परेशान हैं। शहर के अलावा आस पास के क्षेत्रों में भी मंदी आ गई है जिससे मजदूरों को कार्य नहीं मिल रहा है। बालू व्यवसायी अजीत ने बताया कि इस वक्त 13 हजार रुपये प्रति ट्राली के हिसाब से बालू किसी प्रकार आ रहा है जो कि कभी 2000 रुपये हुआ करता था। रविनगर निवासी दिलीप सिंह ने बताया कि चार माह पहले मकान का निर्माण शुरू कराया था लेकिन बालू का रेट आसमान छूने के कारण कार्य रोक दिया गया। मजदूरी का कार्य करने वाले सकलडीहा निवासी सोनेराम ने बताया कि साथियों के साथ काम की तलाश में शहर में आते हैं लेकिन पिछले कुछ महिने से हालात यह हैं कि कई बार बिना कार्य के ही घर वापस लौट जाना पड़ता है। नियामताबाद निवासी सोहन ने बताया कि आसपास भी गांवों में कार्य नहीं मिल रहा है। शहर में भी निर्माण कार्य कम होने के चलते स्थिति काफी खराब है।