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मूसाखाड़ बांध के रख रखाव पर सरकार का ध्यान नहीं

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चकिया। प्रदेश के बड़े बांधों में शुमार मूसाखाड़ बांध के रखरखाव की ओर सरकार का ध्यान नहीं है। इससे बांध साल-दर-साल कमजोर होता जा रहा है। बांध के मरम्मत की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के साथ बिहार सरकार की भी है, दो राज्यों के बीच बंधे के मरम्मत का काम लटका हुआ है। इससे लोगों को चिंता सताने लगी है। वर्ष 2003 में बिहार सरकार ने 50 लाख रुपया की सहायता देने के अलावा बांध के लिए कुछ नहीं किया है। बांध के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रदेश सरकार को भेजे गए 33 करोड़ का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में चला गया है।
मूसाखांड़ बांध का जलस्तर वर्ष 2000 में अचानक बढ़ जाने से बांध को काफी क्षति पहुंची थी। इसके चलते बांध से अचानक एक लाख 27 हजार क्यूसेक पानी कर्मनाशा नदी में छोड़ा गया था। इससे जिले के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। बांध में पानी का दबाव बढ़ने से बांध के कच्चे हिस्से में कई पॉट होल्स बन गए थे तथा फिल्टर सिस्टम से गंदा पानी निकलने लगा था। इस स्थिति के बाद केंद्रीय जल आयोग तथा डैम सेफ्टी सेल के अधिकारियों ने बांध का दौरा कर बांध को खतरनाक की श्रेणी में बताया था। इसके बाद से ही चंद्रप्रभा प्रखंड ने बांध के सुदृढ़ीकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करके उसे नाबार्ड से वित्तपोषित कराने की कवायद शुरू कर दी थरी। 11 करोड़ की प्रस्तावित कार्ययोजना बढ़ते-बढ़ते 33 करोड़ तक पहुंच गई है लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा ध्यान न दिए जाने से कार्य योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। वहीं बिहार सरकार ने वर्ष 2003 में 50 लाख रुपये देने के बाद से चुप्पी साध ली। बांध के पानी का एक तिहाई हिस्सा बिहार को दिया जाता है तथा बांध के मरम्म्त के लिए भी निर्धारित कार्ययोजना का एक तिहाई धन बिहार सरकार को देने का एग्रीमेंट है। बांध साल-दर-साल कमजोर होता जा रहा है। इससे जनपद के निचले इलाकों के लिए बड़ा खतरा कभी भी उत्पन्न हो सकता है। मूसाखाड़ बांध के किसान भगवान सिंह, जैराम सिंह, रामअवध सिंह, नौशाद खान, शाहिद अली, राजन सिंह, प्रमोद चैहान, राजेंद्र दूबे, भगवान दास मौर्या का कहना है कि बांध किसानों के लिए लाइफ लाईन है। इसके अनुरक्षण में सरकार की उपेक्षा किसानों के लिए कभी भी भारी पड़ सकती है। किसानों का कहना है कि मूसाखाड़ बांध की जर्जरता से क्षेत्र और जिले का हर जनप्रतिनिधि वाकिफ है। जनप्रतिनिधि भी उदासीन बना हुआ है। चंद्रप्रभा प्रखंड के अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा कहते हैं कि बांध के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रोजेक्ट बनाकर कई बार सरकार को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि धनराशि स्वीकृत होते ही कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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शिकारगंज। मुजफ्फरपुर बीयर से निकलकर आधा दर्जन गांवों की सिंचाई करने वाली हेतिमपुर माइनर पर चकिया-अहरौरा मार्ग पर सड़क क्रास करने के लिए लगी ह्यूम पाईप में पानी का प्रवाह बाधित होने से टेल के किसानों को पानी नही मिल पा रहा है। इससे टेल के किसान हर वर्ष सिंचाई के संकट से जूझने को विवश हैं। किसानों ने ह्यूम पाईप को हटाकर वहा पुलिया निर्माण करने की मांग की है।
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मुजफ्फरपुर बीयर से निकलकर क्षेत्र के पठारी गांवों हेतिमपुर, दूबेपुर माफी, ग्वालीपुर, मेंहदिया, पचफेड़िया, ढोलकिया गांवो के 900 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई हेतिमपुर माइनर करती है। यह माइनर जहां चकिया-अहरौरा मार्ग को क्रास करती है, वहां सड़क के नीचे ह्यूम पाईप लगी हुई है। इसके जरिए माइनर का पानी सड़क को क्रास कर दूसरी ओर जाता है। हेतिमपुर माइनर की सफाई वर्षों से न होने के कारण नहर में सिल्ट जमा होता रहा है। इससे ह्यूम पाईप का बड़ा हिस्सा मिट्टी से ढंक गया है तथा ह्यूम पाईप में कचरा जमा होने से पानी का प्रवाह पहले की अपेक्षा आधे से भी कम रह गया है। इसके कारण टेल के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नही मिल पा रहा है। पानी न मिलने से किसानों की स्थिति दयनीय होती जा रही है। माइनर के टेल के किसान उमा दूबे, नरेन्द्र सिंह, बिहारी पाल, सच्चिदानंद दूबे, विनोद दूबे, विजयानंद दूबे, रामकुमार यादव, घुरफेकन यादव, देवशरण गुप्ता, छोटू यादव, अछैबर यादव, सुधार यादव, कमला यादव, महेंद्र मौर्या का कहना है कि यदि ह्यूम पाइप को हटाकर वहां पुलिया का निर्माण कर दिया जाए तो पानी का प्रवाह दोगुना हो जाएगा। इससे टेल के किसानों को पर्याप्त पानी मिलेगा। किसानों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष तथा ब्लाक प्रमुख से ह्यूम पाइप को हटाकर वहा पुलिया बनाने की मांग की है।
कृष्ण मुरारी मिश्र
बाइट-4200
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