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%काल कलौटी उज्जर धोती, ऐ मौला तू पानी दे

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नियामताबाद। मानसून का आगाज होने के बाद भी बारिश न होने से किसान परेशान हैं। पानी के अभाव में खेती पिछड़ रही है। ऐसे में किसानों ने टोटकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। स्थानीय विकास खंड के गोधना गांव में सोमवार को हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के युवकों ने वसीम अहमद के नेतृत्व में काल कलौटी खेला।
सोमवार को गोधना गांव के युवक ईदगाह पर एकत्र हुए। जहां से टोली बनाकर पूरे गांव में भ्रमण करना प्रारंभ किए। युवक काल कलौटी उज्जर धोती, ऐ मौला तू पानी दे, कहते हुए हर घर के बाहर जाकर लेटते रहे। घर की औरतें उनके ऊपर पानी फेंकती रही। साथ ही उन्हें भिक्षा भी देती रही। पूरे गांव के भ्रमण के बाद सभी युवक शाम को बाबा हनीफशाह रहमतुल्लाह के स्थान पर एकत्र हुए। यहां बरसात के लिए दुआख्वानी की गई। साथ ही भिक्षा में मिले अनाज व पैसे से तैयार प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर वसीम, रवि कुमार, सिफान, नौशाद, जीशान अहमद, आकिब, आरिफ, कासिफ, मेराज अहमद, इरफान अहमद, तौहिद अहमद आदि मौजूद रहे।
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चकिया। मानसून सत्र के आरंभिक चरण की बेरुखी से धान के कटोरे में मौजूद 55 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर सूखे का खतरा मंडराने लगा है। आद्रा नक्षत्र के समाप्त होने पर भी बरसात न होने से किसान हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। बांधों, बंधियों में सिंचाई के पानी की कमी धान की रोपाई के लिए समस्या उत्पन्न हो गई है। किसानों का कहना है कि मानसून के आरंभिक चरण में पिछले तीन दशक में ऐसी स्थिति कभी नही हुई है।
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धान के कटोरे के दक्षिणी हिस्से में स्थित चकिया, शहाबगंज, नौगढ़ तथा चंदौली आंशिक क्षेत्र मानसून सत्र के पहले चरण की विफलता से जुझने को बाध्य हैं। इस सत्र में अब तक मात्र 20 मिलीमीटर बरसात ही हो सकी है। जिससे धान की रोपाई का श्री गणेश भी नही हो सका है। पर्वतीय वन क्षेत्र में मौजूद तीन बड़े बांधों के जलाशय सूख चुके हैं तथा 107 छोटी-बड़ी बंधियां भी पानी की कमी है। इसके कारण धान के कटोरे का दक्षिणी हिस्सा पूरी तरह मानसून आधारित बन कर रह गया है। जून माह के पहले पखवारे में धान की नर्सरी डालने वाले किसानों की नर्सरी तैयार हो चुकी है। पानी न होने से धान की रोपाई अभी तक आरंभ नहीं हो सकी है। क्षेत्र के चंद्रशेखर पटेल, प्रभात पटेल, विजय त्रिपाठी, मंशाराम तिवारी, घनश्याम सिंह, प्रमोद चौहान, श्यामलाल कुशवाहा आदि किसानों का कहना है कि आद्रा नक्षत्र में इस तरह की बरसात की बेरुखी पिछले तीन दशक में कभी भी नहं दिखी है। हालत यह है कि भीषण धूप एवं गर्मी के चलते धान की नर्सरी भी झुलस रही है। चंद्रप्रभा प्रखंड के अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा कहते हैं कि बरसात न होने से बांधों तथा बंधियों की हालत खराब है।
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