मुगलसराय। सरकार ने अपने वर्तमान कार्यकाल के पांचवां बजट प्रस्तुत किया, इस बजट से लोगों को बहुत अपेक्षाएं थी। बजट में आम लोगों के लिए बहुत सारे सपने दिखाए गए हैं लेकिन उसे पूरा कैसा किया जाएगा, यह नहीं बताया गया है। इस बजट को देखने के लिए लोगों में सुबह से ही उत्सुकता दिखी।
सुबह संसद सत्र शुरू होने के पहले ही लोग टीवी के आगे चिपक गए और एक्सपर्ट की राय देखने लगे। यहीं नहीं वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट को देखा और समझा। नगर के एलबीएस कटरा, परमार कटरा, जीटी रोड, गल्ला मंडी में जगह जगह दुकानों में इलेक्ट्रानिक की दुकानों में लगे टीवी सेट के सामने बजट को देखने के लिए लोग जुटे रहे। युवा भी मोबाइल पर टीवी और नेट के जरिए बजट को देखा। यही नहीं इसको लेकर जगह जगह खूब चर्चा हुई। दिन भर वाट्स पर इसको लेकर कमेंट बाजी होती रही। किसी ने इसे अच्छा तो किसी ने उसे निराशाजनक बताया।
आम बजट पूरी तरह आम लोगों का बजट है। चुनाव के पूर्ववर्ती वर्ष में प्रस्तुत बजट लोक लुभावन लेकिन संतुलित बनाने की कोशिश की गई है। सरकार एक तरह गरीब, किसानों के हित वाला दिखने की कोशिश की है। स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा से पचास करोड़ लोगों को अच्छादित करने की कोशिश अच्छा कदम, वृद्धों के लिए बैंक, पोस्टआफिस के एफडी, सेविंग एकाउंट्स से पचास हजार तक की आय को कर मुक्त रखना अच्छा कदम है। एसेसमेंट को आनलाइन किए जाने से भ्रष्टाचार पर रोक लग सकेगी। किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना और पशु पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड देने से इस क्षेत्र में कुछ भला हो सकेगा। हालांकि बजट में छोटे उद्यमियों और नौकरी पेशा वर्ग के लिए राहत दी जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।लघु व सीमांत उद्योगों के लिए टैक्स की दर घटाने की जरूरत थी। 250 करोड़ तक के टर्न ओवर वाले कंपनियों पर 25 प्रतिशत तक की दर से कारपोरेट टैक्स लगाया गया है। इससे बड़े व्यापारियों को फायदा होगा। महंगाई को देेखते हुए इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की आवश्यकता थी। महंगाई पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट नहीं कहा गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर एक प्रतिशत सेस की दर बढ़ाने से महंगाई बढ़ेगी। कुल मिलाकर इस बजट को न तो बहुत अच्छा कहा जा सकता है और न ही खराब।
अंजनी कुमार सिंह
चार्टेड एकाउंटेंट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में आम तौर पर सबके लिए कुछ न कुछ दिया है। यदि किसी को नहीं दिया है तो कुछ लिया भी नहीं है। आम तौर पर सरकार कार्यकाल के अंतिम दौर में लोक लुभावन बजट पर अधिक ध्यान देती है और भूमिगत ढांचे के विकास पर कम ध्यान देती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया है। वित्तमंत्री ने गरीब, किसान, वंचित समाज केेे लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने की कोशिश की है वहीं मध्यमवर्गीय वर्ग को उनकी हालत पर छोड़ दिया है। कर के वर्तमान स्लैब को उसी तरह छोड़ दिया है। नौकरी पेशा वर्ग के लिए 40,000 रुपये ट्रांसपोर्ट और मेडिकल जैसे मदों में काटकर कर आय की गणना करने की सुविधा देकर खुश किया तो सेस और एचआरए के एक लाख रुपये तक आय पर पैन कार्ड अनिवार्य करने और दो लाख रुपये के एचआरए पर टीडीएस काटकर इसे बराबर कर दिया है। छोटे उद्योगों के लिए भी अधिक राहत की घोषणा नहीं की गई है। दूसरी तरफ स्वास्थ्य बीमा की रकम पांच लाख तक करने और इस बीमा में पचास करोड़ लोगों को अच्छादित करने की घोषणा कर आम लोगों को राहत दी है। आठ करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला योजना से अच्छादित कर और किसानों के लिए फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना बढ़ाकर किसानों को खुश करने की कोशिश की है।
शम्स तबरेज
चार्टेड एकाउंटेंट
बजट आम लोगों की अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। इससे महंगाई बढ़ेगी। शिक्षा और स्वास्थ्य पर सेस लगाना गलत है। एक तरफ तो सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने की घोषणा कर रही है, दूसरी तरफ शिक्षा पर सेस बढ़ा रही है। चुनावी वर्ष में लोगों की सरकार से बहुत सी अपेक्षाएं थी लेकिन वह पूरी नहीं हुई है। सरकार विकास के दावे तो कर रही है लेकिन यह सब कैसे होगा इसे स्पष्ट नहीं कर रही है। अपने बजट में सरकार ने कृषि क्षेत्र, सामाजिक आर्थिक ढांचे को बढ़ावा देने की घोषणा की है, लेकिन यह तो लगातार सभी सरकारें कर रही है। इसका असर कितना हो रहा है, यह देखने वाली बात है। रेलवे में ढांचा युक्त बदलाव की घोषणा की गई, यह अच्छी पहल है। इसी तरह आठ करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत अच्छादित करने, गंगा के किनारे के गांवों को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने, सभी लोगों के घरों तक बिजली पहुंचाने, आम लोगों को स्वास्थ्य बीमा से अच्छादित करना भी अच्छी पहल है लेकिन इसका क्रियान्वयन भी ठीक ढंग से होना चाहिए।सेस लगाकर और मध्यम वर्गी लोगों को कर में राहत न देकर बड़े वर्ग को सरकार ने निराश किया है।
डॉ. जयदीप सिंह अर्थशास्त्री
. बजट में सिर्फ शब्दों की बाजीगरी है, विकास के सपने हैं, लेकिन सपनों को हकीकत में कैसे बदला जाएगा, इसका कोई रोडमैप नहीं है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम लोगों को विकास के सपने दिखाए है। चुनावी बजट में लोगों को महंगाई से राहत मिलने, कर ढांचे में बदलाव की आशा थी लेकिन बजट इस मामले में पूरी तरह निराश करती है। वित्तमंत्री ने किसानों की बेहतरी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने, पट्टा किसानों के लिए नीति में बदलाव करने, पशु पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड देने की घोषणा की है। इसके अलावा सामाजिक पहल के तहत गरीबों के लिए आवास और शौचालय बनाने, घरों तक बिजली पहुंचाने की घोषणा की है, यह आम तौर पर हर बजट में सुनने को मिलता है लेकिन जब तक जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी, कुछ नहीं होगा। मध्यमवर्गीय लोगों के हित में कदम उठाने की जरूरत थी। लघु और सीमांत उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई। डेढ लाख आरोग्य सेंटर खोलने, 10 करोड़ परिवारों को इलाज के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये हर साल देने की घोषणा अच्छी पहल है।
डॉ. सुरेन्द्र मिश्र अर्थशास्त्री
बजट में सरकार की दोहरी नीति साफ झलक रही है। एक तरफ सरकार शिक्षा में छूट की बात करती है दूसरी तरफ सेस 1प्रतिशत से से 3 प्रतिशत कर दी है। मध्यम व छोटे उद्योग के लिए बजट में कुछ नहीं है। एक तरफ 250 करोड़ के कंपनियों के लिए 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत के दिए जबकि 250 करोड़ की बहुत गिनी चुनी कंपनियां हैं। छोटे उद्यमी 50 करोड़ के नीचे की कंपनियों को 15 प्रतिशत टैक्स लगाए जाने की आशा में थे। इनकम टैक्स स्लेब में कोई बदलाव नही किया गया जो निराशा जनक हैं। कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से सभी तबके के लोगो पर महंगाई की मार पड़ेगी।
चंद्रेश्वर जायसवाल
आम बजट व्यापारियों के लिए बहुत अच्छा नहीं है। एक बार फिर सरकार ने अच्छे दिनों का सपना दिखाया है लेकिन वह पूरा कैसे होगा, इसका पता नहीं है। उल्टे सेस लगाकर महंगाई बढ़ा दी है। सबसे जरूरत व्यापार को बढ़ावा देने की थी लेकिन व्यापारियों के लिए बहुत कुछ नहीं किया गया है। ढांचागत विकास के वादे किए गए हैं लेकिन यह कैसे पूरा होगा पता नहीं। कुल मिलाकर यह बजट महंगाई और आम लोगों के दुश्वारियों को बढ़ाने वाला है। टैक्स स्लैब को बढ़ाना चाहिए था, उसे नहीं किया गया।
राजकुमार जायसवाल
व्यापारी, मुगलसराय
मुगलसराय (ब्यूरो)। बजट में महिलाओं के लिए वित्तमंत्री ने अच्छा कदम उठाया है। उज्ज्वला योजना और बिजली कनेक्शन देने के लिए सौभाग्य योजना से महिलाओ की जिंदगी में कुछ सुधार होगा। शास्त्री कालोनी निवासी ममता सिंह कहतीं हैं कि वित्तमंत्री ने मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने की उज्ज्वला योजनऱ में आठ करोड़ महिलाओं को अच्छादित करने की घोषणा की है। इससे महिलाओं को लकड़ी के धूंए से आजादी मिलेगी। छोटी बचत योजनाओं पर ब्जाज बढ़ाने की जरूरत थी। गरीबों को बिजली का मुफ्त कनेक्शन देकर भी आम लोगों के हित में सरकार काम कर रही है। सर्वाधिक अच्छी पहल दस करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा लाभ योजना से जोड़ना है। कुल मिलाकर महिलाओं के लिए यह बजट अच्छा कहा जाएगा। इसी तरह खोर निवासिनी जान्हवीं कहती हैं कि महिलाओं के लिए बजट में काफी सुविधाएं दी गई है। भले ही टैक्स स्लैब नहीं बढ़ाया गया है लेकिन स्वास्थ्य बीमा का लाभ देना, किसानों के लिए आय बढ़ोत्तरी की बात अच्छी है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के लिए 5750 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इससे महिलाओं को रोजगार मिल सकेगा और वे आत्मनिर्भर होकर देश के विकास में योगदान द सकेेंगी।
कर्मचारियों के अनुकूल नहीं रहा सरकारी बजट
मुगलसराय। आम बजट सरकारी कर्मचारियों के लिए अच्छा नहीं रहा। यह भी कह सकते हैं कि पूरे बजट में सरकारी कर्मचारियों को कुछ नहीं मिला, उल्टे उनका नुकसान हो रहा है। रिक्त पदों पर कर्मचारियों की भर्ती के बारे में कोई घोषणा नहीं की गई। कर्मचारियों को मिलने वाले लाभांश में कटौती की गई है और महंगाई के बाद भी टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
पूर्व मध्य रेलवे इंटर कालेज के प्राचार्य मेजर अमरेन्द्र सिंह कहते हैं कि बजट आम तौर पर अच्छा है लेकिन कर्मचारियों के हित में नहीं है। सरकार ने अधिकतम 40,000 रुपये ट्रांसपोर्ट और मेडिकल जैसे मदों में काटकर कर आय की गणना की सुविधा दी है लेकिन एचआरए दो लाख होने पर टीडीएस कटौती और एक लाख होने पर पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया है। इस तरह एक हाथ दे और दूसरे हाथ ले वाही कहावत चरितार्थ कर दी है। रेलवे के विकास की घोषणा तो की गई है लेकिन पूरा खाका नहीं खींचा गया है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह कहते हैं कि सरकार एक तरफ तो शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कह रही है दूसरी तरफ शिक्षकों की अवहेलना कर रही है। सरकारी कर्मचारियों की जायज मांगों को भी पूरा नहीं किया जा रहा है। चुनावी वर्ष में टैक्स स्लैब बढ़ाने की आशा थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। शिक्षा पर एक प्रतिशत सेस बढ़ाकर गलत किया गया है। रेलकर्मी प्रदीप सिंह यादव कहते हैं कि रेल भारत की जीवन रेखा मानी जाती है। इसके विकास के लिए और काम होना चाहिए था। सर्वाधिक जरूरत इसके इंफ्रास्टक्चर बढ़ाने की जरूरत है। सरकार ने भारी भरकम बजट तो घोषित किया है लेकिन इसमें पारदर्शिता नहीं दिख रही है। दीपक कुमार कहते हैं कि महंगाई को देखते हुए आम लोगों के हित में योजना बनाए जाने की जरूरत थी। सरकार ने गरीबों और किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई लेकिन मध्यमवर्गीय और नौकरी पेशा को भूल गई।