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शासन के आश्वासन पर आशाओं का धरना समाप्त,

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राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और आशा केंद्र खोले जाने की मांग को लेकर आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं का धरना मंगलवार को समाप्त हो गया। प्रदेश नेतृत्व के निर्णय के बाद कार्यकर्ताओं ने काम पर वापस लौटने का निर्णय लिया। कहा कि शासन ने जनवरी माह में आशाओं की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। यदि सरकार ने अपने वादे पर अमल नहीं किया तो पुन: आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
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इसके पूर्व धरने के अंतिम दिन आशाओं ने स्वास्थ्य विभाग और शासन के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। कहा कि आशाएं विगत 12 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हैं और सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। लेकिन बदले में उन्हें सरकार की तरफ से कुछ भी नहीं मिलता है। काम के एवज में उनको नियमित मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता है। यात्रा भत्ता आदि भी नहीं दिया जाता है। कहा कि ग्रामीण इलाके में आशा केंद्रों की व्यवस्था न होने से कार्य करने में परेशानी उठानी पड़ती है। विभागीय अधिकारी और सरकार द्वारा आशाओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इस अवसर पर धीरज, मीरा, रेखा, कमलावती, संध्या, सीमा, प्रतिमा, अंजनी, सुनीता पूनम आदि रहीं।
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